एबीएन न्यूज नेटवर्क, रांची/लोहरदगा। झारखंड की खनिज संपदा और राज्य के संवैधानिक अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में लोहरदगा सांसद सुखदेव भगत ने प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार के एमएनआरडी (खान एवं खनिज) संशोधन बिल पर तीखा हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश सहित पार्टी के पदाधिकारी एवं प्रवक्ता इस दौरान मौजूद रहे।
सांसद सुखदेव भगत ने सीधे सवाल खड़ा करते हुए कहा कि झारखंड की जमीन होगी, झारखंड में खनन होगा, प्रदूषण और विस्थापन का दर्द यहां की जनता सहेगी, लेकिन खनिज संसाधनों से जुड़े फैसले दिल्ली में होंगे- यह कैसे स्वीकार किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि केंद्र का यह कदम केवल झारखंड के अधिकारों पर हमला नहीं, बल्कि देश के संघीय ढांचे और संविधान की मूल भावना को कमजोर करने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि झारखंड देश के सबसे समृद्ध खनिज राज्यों में है, लेकिन खनन का सबसे बड़ा बोझ भी इसी राज्य की जनता उठाती है। गांव उजड़ते हैं, जमीन जाती है, पर्यावरण प्रभावित होता है और स्थानीय लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है। ऐसे में राज्य सरकार के अधिकारों को सीमित करना झारखंड के साथ सीधा अन्याय है।
सांसद ने सेस के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि हमें सेस लगाने का अधिकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मिला है। जब सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों के अधिकार को मान्यता दी है, तो क्या मोदी सरकार सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर हो गई है? उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को संवैधानिक संस्थाओं और राज्यों के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।
भगत ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन से झारखंड के राजस्व हितों को बड़ा झटका लग सकता है और इसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से होने वाली आय का लाभ झारखंड की जनता को मिलना चाहिए, क्योंकि इस संपदा की कीमत यहां के लोग अपनी जमीन, जंगल, पर्यावरण और विस्थापन के रूप में चुका रहे हैं।
उन्होंने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों को कमजोर कर कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों के हितों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ऐसी किसी भी नीति का विरोध करेगी, जिससे झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और यहां के आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों पर चोट पहुंचे।
सांसद सुखदेव भगत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लड़ाई केवल एक बिल की नहीं, बल्कि झारखंड के अधिकार, यहां की अस्मिता और संवैधानिक संघीय व्यवस्था की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में पूरी मजबूती से उठाएगी और जरूरत पड़ी तो सदन से सड़क तक निर्णायक संघर्ष करेगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी झारखंड सरकार के साथ मिलकर इस मामले में कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी, ताकि राज्य के संवैधानिक अधिकारों, राजस्व हितों और आदिवासी समाज के हक की रक्षा की जा सके। प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से खनन संशोधन बिल पर पुनर्विचार करने तथा राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की।
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