एबीएन हेल्थ डेस्क। 7 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि आज के आधुनिक दौर में जहां एक ओर तकनीकी विकास ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर अनियमित दिनचर्या, तनाव, शारीरिक निष्क्रियता और असंतुलित खानपान ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को तेजी से बढ़ाया है।
ऐसे परिवेश में योग एक प्राचीन भारतीय पद्धति होते हुए भी आधुनिक विज्ञान द्वारा प्रमाणित एक प्रभावी और समग्र समाधान के रूप में उभरकर सामने आया है। भारतीय योग परंपरा के महान ऋषि पतंजलि ने योग को चित्त की वृत्तियों के नियंत्रण के रूप में परिभाषित किया है, जो यह स्पष्ट करता है कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन का भी विज्ञान है।
वर्तमान वैज्ञानिक शोध भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं कि शरीर और मस्तिष्क का गहरा संबंध है और मानसिक संतुलन बनाये रखने से शारीरिक स्वास्थ्य स्वत: बेहतर होता है। योग इसी सिद्धांत पर कार्य करता है और शरीर, मन तथा आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाये तो योग शरीर में होने वाली कई महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं को संतुलित करता है।
जब व्यक्ति तनाव में होता है, तब शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे उच्च रक्तचाप, अनिद्रा, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। योग, विशेषकर प्राणायाम और ध्यान, पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करते हैं, जिससे शरीर रिलैक्स अवस्था में आता है और इन तनाव हार्मोन का स्तर नियंत्रित होता है। इसके साथ ही योग करने से मस्तिष्क में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे सकारात्मक हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जो मानसिक शांति, खुशी और संतुलन प्रदान करते हैं।
हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में भी योग अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। नियमित योगाभ्यास से रक्तचाप नियंत्रित रहता है। हृदय गति संतुलित होती है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम घटता है। इसके अतिरिक्त योग और प्राणायाम शरीर में आॅक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाते हैं, जिससे कोशिकाओं का कार्य बेहतर होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है।
यही कारण है कि नियमित योग करने वाले व्यक्तियों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता अधिक पायी जाती है। आज की जीवनशैली में, जहां लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, शारीरिक गतिविधियों की कमी होती है और मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। योग एक संतुलनकारी भूमिका निभाता है। यह न केवल शरीर को लचीला और मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता, एकाग्रता और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है।
विशेष रूप से अनुलोम-विलोम, कपालभाति और भ्रामरी, नाड़ी शोधन जैसे प्राणायाम श्वसन तंत्र को सुदृढ़ करते हैं, जबकि ताड़ासन, भुजंगासन, पवनमुक्तासन और वज्रासन जैसे योगासन शरीर के विभिन्न अंगों को सक्रिय और संतुलित रखते हैं। नियमित ध्यान अभ्यास से व्यक्ति मानसिक रूप से शांत, स्थिर और जागरूक बनता है।
योगाचार्य महेश पाल का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन केवल 30 मिनट योग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर ले, तो वह अनेक शारीरिक और मानसिक बीमारियों से बच सकता है। योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता और इसे हर आयु वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार आसानी से कर सकते हैं।
विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम केवल स्वास्थ्य के महत्व को समझें ही नहीं, बल्कि उसे अपने जीवन में व्यवहारिक रूप से अपनाएं। योग एक ऐसा सरल, सुलभ और वैज्ञानिक मार्ग है, जो हमें संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है। यदि हम नियमित रूप से योग का अभ्यास करें, तो हम न केवल स्वयं को स्वस्थ रख सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ और जागरूक समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
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