ताकतवर गणेश जी की बाल कहानी

 

राजकुमारी पांडेय 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। गणेश जी के कान बहुत बड़े थे। उनका नाक हाथी के सूड़ जैसा था। उनका पेट बहुत बड़ा मटके जैसा था। उनको लड्डू और मोदक बहुत पसंद था। एक बार में वो एक नहीं, दो नहीं बल्कि दस लड्डू खा लेते थे। गणेश जी के पड़ोस मे गोविंद सिंह रहता था। उसके बेटे सोमदेव की शादी थी। सोमदेव गणेश जी का दोस्त था। सोमदेव की मां यमुना देवी अपने पति गोविंद सिंह से कहती है, सोमदेव की शादी में गणेश जी को साथ नहीं ले जायेंगे। 

गोविंद सिंह ने पूछा कि गणेश जी तो अच्छे बालक हैं। उसने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है? उसे सोमदेव की बारात मे क्यों नहीं ले जाना? वो हमारे बेटे सोमदेव का दोस्त भी है। यमुना देवी कहती है, अरे, आपको पता नहीं है क्या गणेश जी कितना खाते हैं। सारी बारात का खाना वो अकेले ही खा जायेंगे। और हां, वो सुंदर भी नहीं है। उसकी सूंड़ जैसी नाक है और एक दांत टूटा हुआ है। सोमदेव की बारात को देखकर सभी हंसेंगे। नहीं, नहीं, गणेश हमारे साथ नहीं जायेगा। 

दूसरे दिन बारात रांची से रामगढ़ चल पड़ी। बारात अभी मेन रोड पार करके चर्च रोड तक पहुंची ही थी कि सोमदेव की गाड़ी का पहिया कीचड़ में फंस गया। सभी बाराती अपनी-अपनी गाड़ियों से उतरे। सब ने मिलकर गाड़ी को धक्का दिया। बहुत सारे लोगों के जूते चप्पल कीचड़ से सन गये। कुछ बारातियों के कपड़ों मे कीचड़ के छींटे लग गये। 

सभी चिंता करने लगे, अब क्या करें? शादी का मुहूर्त करीब आते जा रहा है। दोपहर भी बीत चुकी है। अब शाम हो जायेगी। सभी बहुत परेशान थे। 
सोमदेव सोच रहा था, अब पापा से अपने मन की बात बतला ही दूं। उसे पूरा विश्वास था, मेरा दोस्त गणेश सब ठीक कर देगा। उसने अपने पापा गोविंद सिंह से और माता यमुना देवी से कहा, मां मेरे दोस्त गणेश को बुला लीजिये। 

वो सब ठीक कर देगा। मां यमुना देवि को विश्वास ही नहीं हो रहा था। पर सोमदेव के बार-बार टोकने पर रमेश और गोकुल को गणेश जी के घर भेजती है। तुम दोनों जाओ और गणेश जी को समझा बुझा कर लाओ। वो भी हमारे साथ बारात में चलेंगे। रमेश और गोकुल जैसे ही घर जाने आटो में बैठे सामने से गणेश आते हुए दिखलाई दिया। वे हंसते-गाते झूमते झामते, अपनी सूंड़ हिलाते आ रहा था।

पास आकर गणेश ने यमुना देवी से पूछा, काकी, क्या बात है। बारात यहां क्यों खड़ी है। यमुना काकी ने कहा, गाड़ी का पहिया कीचड़ में धंस गया है। सब थक गये हैं। पर पहिया हिल भी नहीं रहा है। गणेश ने कहा, बस इतनी सी बात है, काकी। ये लो, मैं इसे अभी ठीक कर देता हूं। गणेश गाड़ी के सामने जाकर खड़ा हुआ और अपनी सूंड़ से गाड़ी को धक्का दिया। गाड़ी एक झटके में कीचड़ से बाहर आ गयी। सभी ने जोरों से पुकारा, गणेश जी महाराज की जय हो। 

सीख : आदमी के गुण देखे जाते हैं। उसके गुणों की पूजा होती है। किसी की ताकत और मदद करने की भावना महत्वपूर्ण है। 

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