एबीएन न्यूज नेटवर्क, लोहरदगा। सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से, वे जो कुछ भी करते हैं और जो नीति लागू करते हैं वह नेहरू गांधी के इर्द-गिर्द घूमती है, स्थिति यह है कि वे सच्चाई के साथ नहीं चलते इसलिए वे ऐसे है। हमारी राष्ट्रीय विरासत देश के पास ही रहेगा।
संसद में वायु प्रदूषण पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा यह कोई नई बात नहीं है लेकिन लोग इस प्रदूषण वातावरण में रहने को मजबूर है और सरकार ने इस पर कभी कोई चिंता नहीं व्यक्त नहीं की है। क्या यह सरकार आज भी यही रहेगी कि इस स्थिति के लिए नेहरू जिम्मेदार है? मुझे लगता है कि सरकार उसी राह पर चलेगी। आज हमारे पास एक रोडमैप और योजना होनी चाहिए कि हमें क्या उपाय करने होंगे ताकि हम इसे नियंत्रित कर सके और भविष्य में लोगों के लिए बेहतर वातावरण सुनिश्चित कर सके।
लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार की नीतियों और पर्यावरण संरक्षण को लेकर उसकी कार्यशैली पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से अब तक सरकार जो भी नीति बनाती है या निर्णय लेती है, उसका केंद्र बिंदु नेहरू-गांधी परिवार ही बना रहता है।
सच्चाई और वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के बजाय सरकार आज भी हर समस्या के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराने की राजनीति कर रही है। सांसद सुखदेव भगत संसद में वायु प्रदूषण पर हुई चर्चा के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन आज हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि देश की बड़ी आबादी प्रदूषित वातावरण में रहने को मजबूर है।
इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस चिंता, स्पष्ट नीति या प्रभावी कार्य योजना सामने नहीं आई है।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आज भी सरकार यह मानती है कि प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू जिम्मेदार हैं? यदि ऐसा है तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को अतीत के बहानों से बाहर निकलकर वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
सांसद भगत ने जोर देते हुए कहा कि आज देश को एक स्पष्ट और ठोस रोडमैप की आवश्यकता है, जिसमें यह तय हो कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जाएंगे। उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण, वाहनों के धुएं, शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आबादी और जंगलों की कटाई जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीय विरासत और प्राकृतिक संसाधन देश की अमूल्य धरोहर हैं और इन्हें सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
यदि आज प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ेगा। अंत में सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर प्रदूषण जैसी ज्वलंत समस्या पर गंभीरता से विचार करे और भविष्य में देशवासियों को स्वच्छ, स्वस्थ और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस नीति और योजना तैयार करे।
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