निमंत्रण का स्वरूप लेता ई-कार्ड और सोशल मीडिया

 

अजय दीप वाधवा

टीम एबीएन, रांची। आजकल लोग अपने घर के समारोहों के लिए आमंत्रण सोशल मीडिया के मार्फत भेजने लग गये हैं। विवाह के आमंत्रण भी इ-कार्ड के माध्यम से मोबाइल पर भेज दिये जाते हैं। एक समय था जब विवाह के कई सप्ताह पूर्व विवाह के कार्ड छपवाये जाते थे और फिर मेजबान उनको घर-घर घूम कर बांटते थे।

 इस दौरान वे आने वाले मेहमानों से व्यक्तिगत रूप से मिल भी लेते थे और व्यक्तिगत आमंत्रण भी दे देते थे। पर आजकल यह सब बंद सा हो गया है। लोग ई-कार्ड बनवाते हैं और भेज देते हैं। पर क्या यह वास्तव में आमंत्रण है? मेरे विचार से ई-कार्ड भेजने में कोई समस्या नहीं है। अब समय परिवर्तित हो गया है और सब चीजें डिजिटल होती जा रही हैं। 

इस कारण आमंत्रित करने के तरीका भी बदल गया है तो कोई आश्चर्य की बात नहीं है। हमें इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए। पर समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब लोग ई कार्ड भेज कर अपने कार्य की इतिश्री कर देते हैं, और उसको व्यक्तिगत स्वरूप नहीं देते हैं। मेरे विचार से ई कार्ड भेजने के बाद मेजबान को कम से कम एक बार फोन मेहमान को अवश्य करना चाहिए और व्यक्तिगत रूप से आने का आमंत्रण भेजना चाहिए। 

मेरा यह मानना है कि ई कार्ड होने वाले कार्यक्रम की सूचना मात्र है, यह वास्तव में आमंत्रण नहीं है। ई कार्ड से कार्यक्रम की सूचना मात्र दी जाती है। अगर इसके बाद मेजबान का फोन नहीं आये तो मेहमान को समारोह में नहीं जाना चाहिए। मैने यह कई लोगों को कहते सुना है कि उन्होंने कई लोगों को ई_कार्ड भेज कर खानापूर्ति कर दी है; जिनको बुलाना है उनके पास स्वयं जायेंगे या फोन करेंगे। 

बल्कि संभ्रांत समाज में लोग आने वाले संभावित लोगों की सूची में उनका ही नाम दर्ज करते हैं जिनको उन्होंने व्यक्तिगत रूप से फोन कर बुलाया है। उदाहरण के स्वरूप मेरे एक मित्र ने अपने करीब 1500 जानने वाले लोगों को अपने बेटे की शादी का ई कार्ड भेजा, पर केटरर को सिर्फ 500 लोगों के भोजन की तैयारी का आदेश दिया। 

मेरे कारण पूछने पर उसने साफ कहा कि 1500 लोगों को तो उसने सिर्फ खानापूर्ति के लिए विवाह का समाचार भेजा था, ताकि कल को वे लोग न बुलाने का आरोप न लगायें। जिनको सही में बुलाना था उनकी संख्या तो मात्र 550 से 600 के बीच थी और उसने उनको ही महज फोन किया और इसी कारण भोजन भी मात्र 500 के लगभग लोगों का बनाया गया। 

उसका मानना था कि एकाध मेहमान ही होगा जो ई कार्ड पर आ जायेगा, वरना वे लोग जिन्हें फोन नहीं किया गया है, नहीं आयेंगे। और ऐसा ही हुआ। उसके समारोह में वही लोग आये जिनको ई कार्ड के अलावा व्यक्तिगत रूप से आमंत्रण दिया गया था। इस कारण हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम ई कार्ड का प्रयोग करें पर साथ ही इसमें व्यक्तिगत स्वरूप का भी ध्यान रखें। 

हमें याद रखना चाहिए कि मेहमान को बुला कर हम उस पर एहसान नहीं करते बल्कि वे हमारे समारोह में आकर हम पर एहसान करते हैं। किसी भी समारोह की शान तो मेहमान ही होते हैं। अगर मेहमान ही नहीं तो समारोह कैसे होगा! मैंने एक ऐसा भी केस देखा है जब मेरे एक सहकर्मी ने कुछ वर्ष पूर्व अपने नए घर के गृह प्रवेश का आमंत्रण ईकार्ड के माध्यम से कार्यालय के लगभग 150 लोगों को दिया और इतने हो लोगों के भोजन की व्यवस्था भी की। 

पर एक कार्यालय में होने के बावजूद न उसने व्यक्तिगत रूप से आने के किसी को कहा और न ही किसी को फोन किया। उसके समारोह में मात्र नौ या दस लोग ही आये और वे भी अकेले, परिवार सहित नहीं। इस से न सिर्फ उसका समारोह खराब हो गया बल्कि भोजन भी बर्बाद हुआ। समाज में उसकी छवि भी धूमिल हुई कि उसके लोगों के साथ संबंध अच्छे नहीं हैं और उसके घर कोई नहीं आता!

सामाजिकता का सरोकार भी यही कहता है कि ई कार्ड भेजें पर साथ में व्यक्तिगत फोन कॉल भी अवश्य करें वरना समझदार व्यक्ति ई कार्ड को सूचना मात्र ही समझेगा, आमंत्रण नहीं और वह आपके समारोह में नहीं आयेगा। (लेखक कॉस्ट अकाउंटेंट सह मोटिवेटर हैं।)

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