संत रामपाल जी महाराज के विशेष सत्संग में जुटे हजारों भक्त

 

  • राजा हरिश्चंद्र का उदाहरण: सत्य पालन के बाद भी क्यों नहीं छूटा जन्म-मरण, संत रामपाल जी महाराज ने किया खुलासा

कमल सिंह लोधा

एबीएन सेंट्रल डेस्क (गुना)। बीते रविवार को हनुमान मंदिर, ईदगाहबाड़ी कुशवाहा नगर में एक दिवसीय आध्यात्मिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस सत्संग कार्यक्रम में जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के प्रवचनों का एलसीडी के माध्यम से प्रसारण किया गया। 

सत्संग में दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया। सत्संग के दौरान संत रामपाल जी महाराज ने राजा हरिश्चंद्र की सत्यनिष्ठा से जुड़ी अत्यंत मार्मिक गाथा का विस्तार से वर्णन किया। 

उन्होंने बताया कि किस प्रकार महर्षि विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र की सत्य पर अडिग रहने की परीक्षा ली। सत्य वचन के पालन हेतु राजा को अपना राजपाट, पत्नी और पुत्र तक का त्याग करना पड़ा। अपने कर्तव्य और सत्य की रक्षा करते हुए राजा ने अपने ही पुत्र के अंतिम संस्कार के लिए अपनी पत्नी से कर (टैक्स) की मांग की। 

अंततः उनकी अटूट सत्यनिष्ठा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और सपरिवार अपने लोक में स्थान प्रदान किया। संत रामपाल जी महाराज ने यह भी स्पष्ट किया कि राजा हरिश्चंद्र जैसी महान आत्मा भी शास्त्रविरुद्ध और अपूर्ण साधना के कारण जन्म-मरण के चक्र से मुक्त नहीं हो सकी। 

शास्त्रों के प्रमाणों के साथ उन्होंने बताया कि तत्वदर्शी संत की शरण में जाकर सतनाम का जाप करने से ही पूर्ण मोक्ष संभव है। इस प्रसंग के माध्यम से संत रामपाल जी महाराज ने यह संदेश दिया कि सच्चे गुरु पर पूर्ण विश्वास रखकर उनके बताए मार्ग पर चलने से ही मानव जीवन सफल होता है। 

उन्होंने गरीबदास जी की वाणियों का सरलार्थ करते हुए बताया कि कलियुग के अंतिम चरण में बढ़ती सामाजिक बुराइयों, नैतिक पतन और प्राकृतिक असंतुलन के कारण परिस्थितियां और अधिक बिगड़ेंगी। तभी राजा हरिश्चंद्र वाली आत्मा सम्भल नगरी में जन्म लेगी और अधर्मियों का नाश करेगी। सत्संग के अंत में अनेक श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए। कई लोगों ने नामदीक्षा ग्रहण कर अपने जीवन को नई दिशा प्रदान की।

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