एबीएन सोशल डेस्क। सत्यपुरुष सद्गुरु बंदीछोड़ गरीब दास साहेब जी की वाणी हमें जीवन के गहरे रहस्यों को समझने और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होने का मार्ग दिखाती है। सद्गुरु जी की वाणी की यह साखी आध्यात्मिक सत्य को उजागर करता है:-
आइए, सद्गुरु जी की इस दिव्य वाणी में छिपे एक तत्व, नौ तत्व और चौबीस तत्व के मर्म को विस्तार से समझते हैं।
इस साखी में एक तत्व से अभिप्राय आत्म तत्व से है। यह हमारी चेतना का मूल स्रोत है, वह अविनाशी अंश जो हमें जीवन प्रदान करता है। इसे आत्मा, रूह, या स्वयं का सार भी कह सकते हैं। यह परम सत्ता, यानी परमात्मा का ही एक सूक्ष्म हिस्सा है।
आत्म तत्व से ही नौ तत्वों का उद्भव होता है, जिन्हें सूक्ष्म शरीर या लिंग शरीर के नाम से जाना जाता है। ये वो मानसिक और संवेदी उपकरण हैं जिनके माध्यम से आत्मा इस संसार का अनुभव करती है। ये नौ तत्व निम्नलिखित हैं:
जब यह नौ तत्वों वाला सूक्ष्म शरीर, 15 तत्वों के स्थूल शरीर को धारण करता है, तब कुल मिलकर चौबीस तत्व बनते हैं। यह हमारा भौतिक शरीर है जिसे हम देख और छू सकते हैं।
सद्गुरु गरीब दास साहेब जी के अनुसार, मोक्ष की प्रक्रिया अत्यंत सुंदर और वैज्ञानिक है: मृत्यु के समय, सूक्ष्म शरीर के नौ तत्व उसी आत्मा में विलीन हो जाते हैं जिससे वे उत्पन्न हुए थे। स्थूल शरीर के पाँच महाभूत अपने मूल तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) में समा जाते हैं।
और अंत में, आत्मा स्वयं परमात्मा में समा जाती है, क्योंकि वह उसी का अंश है। यही स्थिति मोक्ष कहलाती है – आवागमन के चक्र से मुक्ति, जन्म और मृत्यु के बंधन से परे, परम शांति और परम आनंद की अवस्था। जब कोई व्यक्ति देह त्यागता है, तो आत्मा, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर (जो अगले जन्म का कारण बनता है) तीनों एक साथ निकलते हैं। सूक्ष्म शरीर आत्मा के साथ मिलकर एक नया शरीर धारण करने का माध्यम बनता है, जब तक कि आत्मा को मोक्ष प्राप्त न हो जाए।
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