एबीएन सेंट्रल डेस्क। कमला नेहरू कॉलेज हिंदी विभाग एवं संस्कृति संज्ञान संस्था द्वारा तुलसी जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित संगोष्ठी राष्ट्रवाद और रामचरितमानस एवं दोहा वाचन प्रतियोगिता पुरस्कार कार्यक्रम का आयोजन कमला नेहरू कॉलेज के सम्मेलन कक्ष में 29 अक्टूबर 2025 को संपन्न हुआ।
कमला नेहरू कॉलेज के सम्मेलन कक्षा में 29 अक्टूबर 2025 को आयोजित कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रोफेसर आदित्य त्रिपाठी प्रोफेसर कॉमर्स श्यामलाल कॉलेज सांध्य, कार्यक्रम के अध्यक्ष अनिल पांडे, वरिष्ठ पत्रकार एवं निदेशक इंडिया फॉर चिल्ड्रन, अति विशिष्ट अतिथि गौरव ललित, वरिष्ठ पत्रकार पीटीआई कमला नेहरू, कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर पवित्रा भारद्वाज, कार्यक्रम के आयोजक डॉ प्रदीप कुमार सिंघल राष्ट्रीय अध्यक्ष संस्कृति संज्ञान एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ साधना अग्रवाल प्रभारी हिंदी विभाग कमला नेहरू कॉलेज, प्रोफेसर पवित्रा भारद्वाज जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि रामचरितमानस आदर्श जीवन जीने का एक माध्यम है हमारी आत्मा और सोच में राम व्याप्त है।
प्रोफेसर आदित्य त्रिपाठी जी ने कहा कि रामचरितमानस और राष्ट्रवाद विषय रामचरितमानस को समझने के लिए हमें सबसे पहले प्रभु श्री राम को समझना होगा। प्रभु श्री राम का जीवन हमें मर्यादित रहना सिखाता है। विश्वामित्र तमाम शक्तियां होने के बावजूद राजा दशरथ से श्री राम और लक्ष्मण को राक्षसों का नाश करने के लिए मांगते हैं। ऐसा वह युवाओं को आगे लाने के लिए करते हैं। हमें अगर जीवन में सफल होना है तो अपने आसपास सकारात्मक और वरिष्ठ जनों से संपर्क स्थापित कर उनका मार्गदर्शन सदैव लेते रहना चाहिए।
डॉ प्रदीप कुमार सिंघल अध्यक्ष संस्कृति संज्ञान संस्थान ने बताया कि संस्था का उद्देश्य रामचरितमानस के द्वारा छात्र-छात्राओं और युवाओं का व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण करना है। अनिल पाण्डेय ने कहा कि रामचरितमानस में एक राष्ट्र की संकल्पना का सुदृढ़ उल्लेख मिलता है। रामचरितमानस के संदर्भ में राष्ट्रवाद हमारे भीतर पहले से ही व्याप्त है। राष्ट्र तभी सुरक्षित होगा जब हम सफल और सक्षम होंगे किंतु इसका यह अभिप्राय बिल्कुल नहीं है कि हम किसी पर आक्रमण कर दें।
रामचरितमानस को आदर्श जीवन जीने का एक माध्यम बनाएं। 20 सितंबर 2025 को कमला नेहरू कॉलेज में श्री रामचरितमानस दोहा वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इस प्रतियोगिता में दिल्ली विश्वविद्यालय के 30 से ज्यादा महाविद्यालयों के 100 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रत्येक विद्यार्थी ने तीन दोहे या चौपाइयों की प्रस्तुति की। इस प्रतियोगिता के प्रथम 13 स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
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