विश्व योग दिवस पर उत्साहपूर्वक गायत्री साधकों ने की योग-साधना

 

उच्चस्तरीय योग-साधना में प्राणायम एवं सोऽहं साधना का अपना महत्व है : योगाचार्य चन्द्रदेव 

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री परिवार रांची युगतीर्थ मुख्य शक्तिपीठ धूर्वा सेक्टर टू,अलकापुरी शक्तिपीठ, धूर्वा बसस्टैंड प्रज्ञापीठ परिसर एवं बुटी मोड़ शाखा ओरमांझी प्रखंड, बुन्डु व राहे प्रखंड इकाई में आज विश्व स्तरीय योगदिवस पर उत्साह व उल्लास पूर्वक योगदिवस गायत्री साधकों ने मनाया। इस अवसर पर योगाचार्य चन्द्रदेव जी ने योगसाधना, राजयोग, प्रज्ञायोग, सहज योग, यम, नियम, प्रत्याहार आहार विहार पर उद्बोधन किया। 

फिर संबंधित आसन, प्राणायम, बन्ध, मुद्रा, आसनों और मुद्रा विज्ञान में रोगानुसार मुद्राएं, आसन, योगाभ्यास एवं ध्यान,धारणा तथा आत्म-परमात्म के योगतत्व व चिन्तन मनन के बिंदु व सूत्रों, उसके समय निर्धारण, स्वच्छ स्थान व शुद्ध वातावरण के चयन पर प्रकाश डाला।

बताया कि इनके प्रयोग व उपयोग से साधकों एवं योगाभ्यासियों को स्वस्थ शरीर और स्वच्छ मन के विकास में पर्याप्त योगदान व लाभ मिलता है और इससे सरलतापूर्वक स्वास्थ्य संरक्षण में प्रगति एवं अनुभुति होती है। बताया कि उच्चस्तरीय योग-साधना में प्राणायम एवं सोऽहं साधना का अपना महत्व है।

आगे बताया कि योग साधनाएं सभी प्रकार के कष्टों के निवारण करने में सक्षम हैं। वरिष्ठ साधक ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय में योग व मानवीय चेतना विज्ञान के अध्ययन व प्रगतिशील प्रतिफल की उपलब्घि पर चर्चा करते हुए बताया कि आज योग पद्धति अपनाने की आवश्यकता बढ़ती जा रही है।

अलकापुरी शक्तिपीठ में राज प्रकाश योग प्रशिक्षक के सानिध्य में  योग दिवस मनाया गया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के प्रचारक सह वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने दी।

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