लोकमाता देवी अहिल्याबाई के मानव सेवा कार्य संपूर्ण भारतवर्ष में समाज के लिए प्रेरणा स्रोत : योगाचार्य महेशपाल

 

एबीएन सोशल डेस्क। संपूर्ण भारतवर्ष में हर साल की भांति इस साल भी 31 मई को लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी का 300वा जन्म उत्सव (जयंती) संपूर्ण भारत बर्ष मैं बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाने जा रहे हैं।

योगाचार्य महेश पाल लोक माता देवी अहिल्याबाई जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताते हैं कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई द्वारा किए गए समाज सेवा के कार्य समाज के हित में और हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी भारत ही नहीं पूरे विश्व में अपने समाज सेवा के कार्य अपनी धर्म परायण नीति, न्याय प्रिय नीति और अपनी राजनीतिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन करने के लिए पूरे विश्व में विख्यात है।

जिस तरह से उन्होंने अपने राज्य को संभाला और मानव सेवा के कार्य के साथ साथ पूरे भारतवर्ष में मंदिरों घाटों का पुनर्निर्माण करवाया जिन्हें विदेशी आक्रमण द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था, लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी का जन्म महाराष्ट्र के चौड़ी ग्राम में 31 मई 1725 मै भेड़-बकरी पशुपालक गाडरी-धनगर (पाल-बघेल-होल्कर) परिवार में हुआ, वह बचपन से ही स्वभाव से चंचल चतुर समझदार न्याय प्रिय, धार्मिक थी।

उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर के साथ हुआ एक युद्ध में खंडेराव होलकर की मृत्यु हो गई उसके पश्चात सन 1767 में मालवा के शासन व्यवस्था महारानी अहिल्याबाई जी ने संभाली और और एक आदर्श हिंदू राज्य व्यवस्था स्थापित की, सनातन धर्म के न जाने कितने तीर्थ मंदिरों का पुनर्निर्माण करवाया घाटों का निर्माण करवाया मानव सेवा के कार्य में बावड़ियों छायादार वृक्ष एवं जनहित के कार्य किये।

महारानी अहिल्याबाई जी ने मालवा क्षेत्र पर लगभग 30 साल तक शासन किया उन्होंने महेश्वर को अपनी राजधानी बनाया,लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी द्वारा किए गए सामाजिक कार्य धार्मिक क्षेत्र के कार्यों द्वारा आज उन्हें संपूर्ण भारतीय जनमानस में देवी का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं, मालवा में तो उन्होंने एक आदर्श हिंदू राज्य स्थापित किया ही लेकिन अपनी राज्य की सीमाओं से परे जाकर भी उन्होंने मंदिरों घाटों का पुनरुद्धार किया।

आज जिन भी स्थानों को हिंदू सनातन तीर्थ स्थानों के रूप में जाना जाता हैं उसके 80 फीसदी निर्माण और पुनरुद्धार लोकमाता देवी अहिल्याबाई जी द्वारा कराए गए हैं, जिसमें, काशी, विश्वनाथ, बैद्यनाथ, सोमनाथ, ओंकारेश्वर, भीमाशंकर, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं बड़े बड़े कुण्ड, धर्म शालाओ, का निर्माण कराया, पुष्कर से लेकर गया तक, अयोध्या मथुरा से लेकर केरल तमिलनाडु तक महारानी अहिल्याबाई जी ने सैकड़ो तीर्थ व मंदिरों को पुनर्जीवित किया काशी, गया, सोमनाथ, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार कांची, द्वारका, बद्रीनारायण, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी का आज जो भी रूप हम देखते हैं वह अहिल्याबाई जी की ही देन है।

अपनी 70 वर्ष के जीवन में चाहे कितने ही दुख झेले हो अहिल्याबाई होल्कर जी ने लेकिन 30 साल के अपने शासन में एक शासक के रूप में वह हमेशा जनता की सेवा में ललगी रही इसलिए आज भी कई राज्यों में उनके नाम से कई लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रहे हैं वही मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अहिल्या विकास बोर्ड का गठन भी किया गया है। 

हमारे भारतीय समाज के युबाओ को  महान वीर वीरांगनाओं के जीवन व उनके चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व से कुछ सीखना चाहिए जिससे कि हमारा युवा पीढ़ी राष्ट्र के लिए कुछ कर सके राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा सके समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म कर एक नए उत्तम संस्कारबान समाज व पीढ़ी को गढ़ सके।

देवी अहिल्याबाई जी का पूरा जीवन संघर्षों के साथ बीता लेकिन फिर भी वह धर्म के साथ डटी  रही और पूरे विश्व में हिंदू सनातन धर्म को स्थापित कर पूरे भारतीय समाज की प्रेरणा स्रोत बनी इसी तरह हम सबको भी अपने जीवन में उच्च कार्यों को करते हुए अपने जीवन को सफल बनाना है और राष्ट्र के निर्माण मै अहम योगदान देना है।

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