एबीएन एडिटोरियल डेस्क। भारत सरकार ने हाल के वर्षों में समावेशी शासन पर अत्यधिक बल दिया है। एक ऐसा शासन, जो भूगोल, पृष्ठभूमि या विश्वास की परवाह किए बिना हर नागरिक तक पहुंचता हो। यह बात वार्षिक हज यात्रा के संचालन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। एक नियमित प्रशासनिक क्रियाकलाप से दूर, यह एक विशाल मानवीय, कूटनीतिक और तार्किक संचालन है, जो अनेक राष्ट्रों और संस्कृतियों तक फैला हुआ है। सबका साथ, सबका विकास के लोकाचार से प्रेरित होकर सरकार ने हज प्रबंधन को 21वीं सदी की सेवा वितरण के मॉडल के रूप में परिणत कर दिया है।
भारत से हर साल लगभग 1.75 लाख तीर्थयात्री पवित्र हज यात्रा पर जाते हैं। सऊदी अरब साम्राज्य (केएसए) के साथ घनिष्ठ समन्वय में, भारतीय हज समिति के माध्यम से चार महीने तक चलने वाले इतने व्यापक और संवेदनशील ऑपरेशन का प्रबंधन करना राष्ट्रीय समन्वय, कूटनीति और सेवा का एक महत्वपूर्ण नमूना है।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि यह आध्यात्मिक यात्रा निर्बाध होने के साथ-साथ गरिमापूर्ण, समावेशी और तकनीकी रूप से सशक्त भी हो। बिना किसी पक्षपात के सभी समुदायों की सेवा करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ, सरकार हज के अनुभव को विदेशों में अब तक किए गए सबसे उन्नत सार्वजनिक सेवा संचालन में से एक के रूप में परिणत कर रही है। हज सुविधा ऐप को भारत सरकार ने 2024 में लॉन्च किया था।
इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों के अनुभव को सरल और बेहतर बनाना था। इसके माध्यम से प्रत्येक तीर्थयात्री से जुड़े राज्य हज निरीक्षकों के विवरण के साथ-साथ निकटतम स्वास्थ्य सेवा और परिवहन सुविधाओं सहित आवास, परिवहन और उड़ान संबंधी विवरण जैसी सूचनाओं तक तत्काल पहुंच कायम करना संभव हो रहा है।
यह ऐप शिकायत प्रस्तुत करने, उसकी ट्रैकिंग करने, बैगेज ट्रैकिंग, आपातकालीन एसओएस सुविधाएं, आध्यात्मिक सामग्री और तत्काल सूचनाएं प्राप्त करने में भी सक्षम बनाता है। पिछले साल 67,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने ऐप इंस्टॉल किया था, जो स्वीकृति की उच्च दर का संकेत देता है। केएसए में भारत सरकार द्वारा हाजियों के लिए स्थापित प्रशासनिक ढांचे द्वारा 8000 से अधिक शिकायतें और 2000 से अधिक एसओएस उठाए गए और उनका जवाब दिया गया।
ऐप की फीडबैक- संचालित डिजाइन तीर्थयात्रा की पूरी अवधि के दौरान निरंतर सुधार की सुविधा देती है। हज-2024 के दौरान ऐप से प्राप्त जानकारी ने 2025 के लिए हज नीति और दिशानिर्देश तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में काम किया। ये डेटा-समर्थित निर्णय भारत सरकार के अपने नागरिकों के लिए उत्तरदायी शासन के मॉडल का उदाहरण हैं।
2024 में इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने अब हज सुविधा ऐप 2.0 लॉन्च किया है। यह हज के पूरे दायरे को कवर करता है और तीर्थयात्रियों के लिए वास्तव में एंड-टू-एंड डिजिटल समाधान तैयार करता है।
हज 2.0 में हज यात्रियों के डिजिटल आवेदन, चयन (कुर्रा), प्रतीक्षा सूची का प्रकाशन, भुगतान एकीकरण, अदाही कूपन जारी करने और रद्दीकरण तथा धन वापसी की प्रक्रियाओं से लेकर हज की पूरी प्रक्रिया शामिल है। अपडेट किया गया ऐप बैंकिंग नेटवर्क के साथ सहज एकीकरण प्रदान करता है, जिससे तीर्थयात्री यूपीआई, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं। यात्रा के दौरान सुविधा के लिए तत्काल उड़ान संबंधी सूची और इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास भी प्रदान किए जाते हैं।
ऐप को पेडोमीटर सुविधा के साथ संवर्धित किया गया है। इसका उद्देश्य तीर्थयात्रियों में पैदल चलने की आदत डालना है, ताकि उनमें आगे की कठिन यात्रा के लिए आवश्यक सहनशक्ति विकसित हो सके। तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए तत्काल मौसम के अपडेट भी जोड़े गए हैं, ताकि तीर्थयात्रियों को जलवायु संबंधी प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिल सके और साथ ही उन्हें स्वस्थ और हाइड्रेटेड रखा जा सके।
भारतीय हज चिकित्सा दल को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है और यह मक्का एवं मदीना में हज के दौरान स्थापित क्षेत्रीय अस्पतालों तथा औषधालयों के नेटवर्क के माध्यम से तीर्थयात्रियों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदान करता है। एम्बुलेंस का एक नेटवर्क आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्रदान करता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के ई-हेल्थ कार्ड और ई-हॉस्पिटल मॉड्यूल को इस वर्ष ऐप के साथ जोड़ दिया गया है। इसका लक्ष्य तीर्थयात्रियों के लिए निर्बाध प्रवेश और उपचार सुनिश्चित करना है। इससे डॉक्टरों को उपचार के लिए उपलब्ध डेटा की गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी और हज 2025 के लिए तीर्थयात्रियों को समुचित चिकित्सा सेवा प्रदान की जाएगी।
ऐप की बहुविध सराहनीय लगेज ट्रैकिंग प्रणाली को आरएफआईडी आधारित टैगिंग के साथ और उन्नत किया गया है। यह गुम हुए सामान को ट्रैक करने की प्रक्रिया को सरल बनाएगा और उच्चतम स्तर की सेवा सुनिश्चित करेगा। मीना, अराफात और मुजदलिफा सहित माशाएर क्षेत्र की डिजिटल मैपिंग द्वारा हज अनुष्ठानों के नेविगेशन को बदल दिया गया है।
तीर्थयात्रियों को उनके गंतव्य तक मार्गदर्शन करने और रेगिस्तान की अत्यधिक गर्मी में खो जाने के जोखिम को कम करने के लिए शिविर स्थलों की पहचान की जाती है और मानचित्र पर ट्रैक किया जाता है। नमाज अलार्म, किबला कम्पास और अस्पतालों, बस स्टॉप, सेवा केंद्रों और भारतीय मिशन कार्यालयों की स्थान-आधारित मैपिंग जैसी सुविधाएं तीर्थयात्रियों के समग्र अनुभव और सुविधा को काफी समृद्ध करती हैं।
एआई द्वारा संचालित एक चैटबॉट को डिजिटल पर्सनल असिस्टेंट के रूप में शामिल किया गया है। यह चैटबॉट संवादात्मक लहजे में नियमित प्रश्नों का उत्तर देने, तत्काल सहायता और सलाह प्रदान करने के लिए है। सुविधाओं का यह समग्र सेट सरकार की मंशा का संकेत है कि वह न केवल सेवा वितरण के साधन के रूप में प्रौद्योगिकी का लाभ उठाना चाहती है, बल्कि एक ऐसे उपकरण के रूप में भी है जो आध्यात्मिक पथ पर चलने वालों सहित सभी के लिए सम्मान, सुविधा और सक्षमता को सशक्त बनाता है।
हज सुविधा ऐप 2.0 भारत के डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी है और यह भारत सरकार के इस दृष्टिकोण का प्रमाण है कि शासन प्रत्येक नागरिक तक सार्थक तरीके से पहुंचे। प्रौद्योगिकी की शक्ति का इस्तेमाल करते हुए, भारत तीर्थयात्रियों के प्रबंधन के लिए नए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित कर रहा है, जिससे अपने नागरिकों को निर्बाध, सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से बेहतर अनुभव मिल रहा है। (लेखक संयुक्त सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार हैं और ये उनके निजी विचार हैं।)
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