आखिर धरती पर कब और कहां से आया सोना

 

कैसे खजाना पहुंचा भारत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरिक्ष में कई रहस्य छिपे हैं, जिन्हें जानने के लिए वैज्ञानिक सालों से शोध कर रहे हैं। इन रहस्यों में सोने जैसे धातु का रहस्य भी छिपा हुआ है। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर सोना कहां से आया? वैज्ञानिकों इन रहस्य को सुलझा लिया है। 

सोने की गिनती दुनिया की महंगी धातुओं में होती है। भारत में शादी और शुभ अवसरों पर सोने से बने आभूषण पहनना एक परंपरा की तरह है। बहुत लोगों को जानकारी होगी कि धरती पर सोना नहीं था। वैज्ञानिकों का कहना है कि सोना पृथ्वी के निर्माण के साथ नहीं आया, बल्कि यह बाद में अंतरिक्ष से धरती पर पहुंचा था।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्रह्मांड में कहीं भी सोना सुपरनोवा न्यूक्लियोसिंथेसिस नामक प्रक्रिया से बनता है। विशाल सितारे फटते हैं, तो यह प्रकिया होती है, जिससे भारी धातुएं, जैसे सोना बनती हैं और अंतरिक्ष में फैल जाती हैं। बताया जाता है कि धरती पर जितना सोना है, मर चुके तारों से आया है। वहां से धरती के भूगर्भ में चला गया। 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब चार अरब साल पहले पृथ्वी पर उल्कापिंडों की भारी बारिश हुई थी। उल्काओं की बारिश से सोने जैसे भारी तत्व धरती पर पहुंचे। पृथ्वी की अंदर की परतों में भारी धातुएं जैसे तांबा, प्लेटिनम और सोना मौजूद थे। 

ज्वालामुखी विस्फोटों की वजह से यह धीरे-धीरे धरती की सतह तक आए। इसके बाद जब ज्वालामुखियों से पिघली धातुएं बाहर आईं, तो सोने के बेहद बारीक कण पानी में घुलने लगे। इससे बहकर नदियों और समुद्रों तक पहुंच गए। इन कणों को बाहर निकालना बेहद कठिन कार्य था। 

पृथ्वी की बाहरी परत का घनत्व हल्का है। इसकी वजह से भारी धातुएं जैसे सोना, धीरे-धीरे पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से में चली गईं। यही वजह है कि सतह पर इसकी मात्रा बहुत कम है। भारत में अधिक सोना खुद नहीं निकला है। हालांकि, व्यापार के माध्यम से देश में बड़ी मात्रा में सोना आया।

प्राचीन समय में भारत से कपड़े, मसाले और कला विदेशों में जाती थी, जिसके बदले में सोना आता था। सदियों से सोना जमा होते-होते इतना सोना इकट्ठा हो गया। अर्थशास्त्रियों के एक आंकड़े के मुताबिक, भारत के पास वर्तमान में करीब 10000 टन से अधिक सोना है। 

एक नये अध्ययन में हुआ ये खुलासा

कोलंबिया विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्र अनिरुद्ध पटेल के नेतृत्व में सोना कहां से आया, इस विषय पर एक अध्ययन किया गया है। इससे पता चला है कि मैग्नेटर्स (अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन वाले तारे) ब्रह्मांड में सोने जैसे भारी तत्वों को बनाने और फैलाने में मदद कर सकते हैं। 

द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में यह अध्ययन प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि मैग्नेटर फ्लेयर्स की इसमें ज्यादा बड़ी भूमिका रही होगी। अध्ययन करने वाले पटेल की टीम ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और नासा के करीब 20 साल पुराने डेटा का इस्तेमाल किया है।

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