एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हम ग्यारहवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मनाने जा रहे हैं और इस वर्ष 2025 का थीम है- मानवता। आज की सबसे बड़ी समस्या बीमारी नहीं है बल्कि सबसे बड़ी समस्या है नैतिकता का तीब्र ह्रास जिस वजह से मानवता खतरे में है। संवेदना हमारी मर रही है दिल के भीतर की भवनायें कमजोर पड़ रही है, विश्वास जो हुआ करता था वो अब मर रही है, समाज के किसी भी व्यक्ति का धौंस किसी के भी बच्चों पर रहता था, किसी भी बच्चे को समाज के अन्य व्यक्ति से अभिभावक जैसा डर रहता था, वो सब इस वर्तमान परिदृश्य से गायब हो गया।
कारण है हमारे अंदर की मानवता सशंकित है,कमजोर हो गयी है, लोभ, नकारात्मक प्रवृत्ति दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। आज मानसिक रोग के बढ़ने का भी यही कारण है। इस वर्ष के अंतर्राष्टीय योग दिवस का पूर्वाभ्यास योग कार्यक्रम रांची शहर में सत्यानन्द योग मिशन के तहत कई स्थानों में चल रहा है। आज 03 मई, शनिवार को डीएवी कपिलदेव के हजारों विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के बीच स्वामी मुक्तरथ जी अपना व्याख्यान एवं योग-ध्यान कार्यक्रम को संचालित कर रहे थे।
मुक्तरथ जी ने कहा बिगड़ता जीवनशैली और संकीर्ण विचारधारा, सीमित सोच से दिमाग में पिट्यूटरी ग्लैण्ड पर बुरा असर होता है, उससे हार्मोन असंतुलित होने लगते हैं, एड्रिनल ग्लैण्ड का हार्मोन असंतुलित होने लगता है जिस कारण अपराध प्रवृत्ति बढ़ती है, नकारात्मकता में वृद्धि होती है और भय बढ़ता है। योग में थोड़ा आसन,कुछ प्राणायाम और दस मिनट ध्यान का ध्यान प्रतिदिन अवश्य करना चाहिये तभी हम मानवता को जिंदा रख पायेंगे।
डीएवी कपिलदेव के प्राचार्य श्री एम के सिन्हा जी पहले स्वामी मुक्तरथ जी के साथ वैदिक हवन किये फिर योगाभ्यास को प्रारंभ किया गया। श्री सिन्हा ने कहा कि योग सबसे बड़ी शक्ति है जो विद्यार्थियों को शरीर से सबल और मन से मजबूत बनाता है। ध्यान से सारी समस्याएं समाप्त हो जाती है और विद्यार्थी को सही दिशा भी मिलता है। (लेखक सत्यानंद योग मिशन रांची के अध्यक्ष हैं।)
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