एबीएन सेंट्रल डेस्क। महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य से शुरू किये गये बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने दस साल पूरे कर लिये हैं। इसकी शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से की गई थी, जिसने आज 10 साल पूरे कर लिए हैं। देश में महिलाओं के उत्थान में इस अभियान ने अहम भूमिका निभायी है।
इस अभियान की सफलता पर राजधानी रांची के जैप वन सभागार में समाज कल्याण विभाग ने एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें विभाग के निदेशक किरण कुमार पासी समेत कई वरीय अधिकारी मौजूद रहे। इस मौके पर मीडियाकर्मियों से बात करते हुए किरण कुमार पासी ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है, जो महिला सशक्तीकरण का संदेश देता है।
आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में जो महिलाएं आगे आ रही हैं, उसमें कहीं न कहीं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की बड़ी भूमिका है। महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और समाज का अहम हिस्सा बनकर अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में सेविका और सहायिका को मिलने वाला मानदेय देश के अन्य राज्यों से अधिक है। इनके द्वारा राज्य में कई योजनाएं चलायी जाती हैं। कहीं-कहीं 600-700 घर आंगनबाड़ी पर निर्भर हैं। बच्चों के टीकाकरण से लेकर उनके पोषण तक की जिम्मेदारी इन आंगनबाड़ी सेविका सहायिकाओं पर होती है।
किरण कुमार पासी ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान का राज्य में बड़ा असर हुआ है। अबुआ सरकार में किशोरी बाई फुले योजना के तहत शिक्षा के लिए 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। इस तरह की योजना पूरे देश में किसी अन्य राज्य में नहीं चल रही है। कोई भी योजना लड़कियों के सशक्तीकरण में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है, यही कारण है कि ड्रॉप आउट दर में लगातार गिरावट आ रही है।
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