फाल्गुन माह में श्री श्याम प्रभु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व

 

  • श्याम प्रभु के आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में सुख- शांति, समृद्धि का होता है वास : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता सह रांची जिला मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि फाल्गुन माह में श्री श्याम प्रभु की पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है। 

फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी भगवान श्री कृष्ण के भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र एवं मंगलमय होता है। क्योंकि यह दिन श्याम प्रभु की उपासना का एक महत्त्वपूर्ण अवसर होता है। फाल्गुन माह की शुक्ल एकादशी 10 मार्च को है इस दिन को श्याम एकादशी भी कहा जाता है,और इस दिन भक्त श्री श्याम प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। 

भक्तों में विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है,क्योंकि श्याम प्रभु की कृपा पाने के लिए यह एक अत्यंत उत्तम समय होता है। जो अपने जीवन में किसी प्रकार की कठिनाई, मानसिक तनाव या आर्थिक समस्या से जूझ रहे होते हैं। श्री श्याम प्रभु की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है और भक्तों के जीवन में सुख- शांति का वास होता है। श्री खाटू श्याम प्रभु भगवान श्री कृष्ण के अवतार माने जाते हैं। उनकी पूजा विशेष रूप से राजस्थान के खाटू धाम में की जाती है, जो श्री श्याम के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। 

देश के सभी श्री श्याम मंदिरों में श्री श्याम जी के उत्सव उल्लास पूर्वक मनाया जाता है खाटू श्याम का जन्म कंस वध के बाद हुआ था,जब कंस के अत्याचारों से बचने के लिए यदुवंशी श्री कृष्ण ने कंस का वध किया था। इसके बाद, श्री कृष्ण ने खाटू में प्रकट होकर वहाँ के ब्राह्मणों के साथ दिव्य उपस्थिति दर्ज कराई, जो आज तक खाटू में दर्शन के रूप में उनकी महिमा को प्रमाणित करती है। कहा जाता है कि खाटू श्याम के दर्शन करने से व्यक्ति के जीवन के समस्त दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं, और उसकी सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं। 

श्याम प्रभु अपने भक्तों से असीम प्रेम करते हैं और उनकी हर समस्या का समाधान अपने चरणों में देते हैं। वे श्री कृष्ण के रूप में भक्तों की मनोकामनाओं को पूरी करने वाले और उनकी रक्षा करने वाले माने जाते हैं। फाल्गुन माह मे शुक्ल एकादशी के दिन खाटू श्री श्याम के सभी मंदिरो में विशेष पूजा-अर्चना और भजन- कीर्तन का आयोजन होता है।

श्री श्याम के प्रति श्रद्धा रखने वाले भक्त यह मानते हैं कि जो भी इस दिन सच्चे मन से श्याम बाबा का ध्यान करता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है और उसे जीवन में सुख-समृद्धि का अनुभव होता है यह दिन भक्तों के लिए श्री श्याम प्रभु की भक्ति जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है, और उनके आशीर्वाद से भक्तों के जीवन में समृद्धि और आशीर्वाद का वास होता है। 

इस दिन लगाएं खाटू श्याम जी के चरणों में अपनी अरदास, हर परेशानी का निकलेगा हल ऐसा माना जाता है कि खाटू श्याम जी हारे हुए व्यक्ति का सहारा बनाकर उसे दुखों से उभारते हैं। इन्हें तीन बाण धारी हारे का सहारा शीश का दानी और लख्तादार भी कहा जाता है। तथा हारे का सहारा कहलाते हैं माना जाता है कि जो भी भक्त बाबा के चरणों में पूरे श्रद्धाभाव से अपनी मनोकामना लेकर पहुंचता है वह जरूर पूरी होती है। 

राजस्थान के सीकर मे स्थित खाटू श्री श्याम मंदिर सहित देश के सभी खाटू श्याम मंदिरों की मान्यता काफी बढ़ी है। रोजाना हजारों की संख्या में भक्त यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। तथा कुछ खास मौकों पर तो बाबा के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। खाटू श्याम जी की कथा महाभारत युद्ध से जुड़ी हुई है। 

असल में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक हैं। कई मान्यताओं के अनुसार उन्हें भगवान कृष्ण का कलयुगी अवतार भी माना जाता है। कथा के अनुसार, बर्बरीक भी महाभारत के युद्ध में भाग लेना चाहते थे। तब उनकी माता ने उन्हें यह कहते हुए युद्ध में जाने की अनुमति दी कि, तुम हारे का सहारा बनना‌। 

भगवान श्रीकृष्ण जानते थे कि बर्बरीक जिस तरफ से युद्ध लड़ेंगे वही पक्ष युद्ध जीत जाएगा। वहीं कौरव हारने की स्थिति में थे। इसलिए भगवान कृष्ण ने एक ब्राह्मण का रूप धारण कर बर्बरीक से उनका शीश, दान के रूप में मांग लिया। बाद में बर्बरीक जी का बलिदान देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलयुग में स्वयं के नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया। इसलिए आज बर्बरीक जी खाटू श्याम के नाम से प्रसिद्ध है।

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