बढ़ते अस्थमा रोग से घटती फेफड़ों की कार्यक्षमता चिंता का विषय बचाव के लिए करे योग-प्राणायाम : योगाचार्य महेश पाल

 

एबीएन हेल्थ डेस्क। हाल के दिनों में अस्थमा के मरीज बढ़ते जा रहे हैं। योगाचार्य महेश पाल बताते हैं की,भारत में करीब 35 मिलियन लोग अस्थमा से प्रभावित हैं।   अस्थमा को दमा भी कहा जाता है। अस्थमा फेफड़ों में वायुमार्ग से संबंधित एक बीमारी है, विशेषकर इसमें साँस लेने और छोड़ने में तकलीफ महसूस होती है, ब्रोन्कियल ट्यूबों में सूजन हो जाती है, जिसके कारण मांसपेशियों के बीच से हवा पास करने में दिक्कत होती आपके फेफड़ों में कई छोटे-छोटे वायुमार्ग होते हैं, जो हवा से आक्सीजन को छानकर आपके ब्लड में पहुंचाते हैं। 

लेकिन जब वायुमार्ग की परत में सूजन आ जाती है और मांसपेशियों में तनाव होता है, तो अस्थमा के संकेत आपको मिलने लगते हैं। फिर वायुमार्ग में बलगम भर जाती है और सांस लेने में कठिनाई होती है, जिसके कारण छाती में जकड़न और खांसी जैसी स्थिति महसूस होती है। इसे अस्थमा या दमा भी कहते हैं। 

जब अस्थमा होता तो हमारे सामने कई लक्षण नजर आते हैं जिसमें छाती में जकड़न, सांस लेने में परेशानी, थकान बलगम वाली खांसी या सूखी वाली खांसी, एक्सरसाइज के दौरान ज्यादा हालत गंभीर होना, रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाना,बार-बार इंफेक्शन होना, हंसते समय खांसी का बढ़ना, जैसे ही हमारे सामने यह लक्षण नजर आते हैं हमें तुरंत प्राथमिक चिकित्सा के रूप योग प्राणायाम प्रारंभ कर देना चाहिए और  डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

योग के अंतर्गत भस्त्रिका प्राणायाम व भुजंगासन का अभ्यास किया जाना चाहिए, भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास से ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन आने से बचाव होता है जिससे हमें सांस लेने मै कठिनाई नहीं होती है, भुजंगासन के अभ्यास करने से छाती की जकड़न व एलर्जी दूर होती है और यह वायु मार्ग में बलगम भरने से रोकता है।

जिससे हम अस्थमा जैसी गंभीर समस्या से बच्चे रहते हैं, अस्थमा रोग होने के पीछे कई कारण होते हैं जिसमें आनुवंशिक कारण वायरल संक्रमण का इतिहास हाइजीन हाइपोथिसिस, एलर्जी रेस्पिरेटरी इंफेक्शन जैसी स्वास्थ्य स्थितियां, तंबाकू धूम्रपान, खराब लाइफस्टाइल, अव्यवस्थित भोजनचर्या, प्रदूषण अस्थमा रोग हमारी अवस्थित जीवनचार्य वह हर चर्चा के कारण हो जाता है।

तब हमारे शरीर में इससे होने वाले कई अन्य शारीरिक समस्याएं जन्म लेती है जिसमें, फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होना, श्वसन तंत्र की विफलता, निमोनिया, और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। इन सारी समस्याओं से बचाव के लिए और हमारी इम्यूनिटी क्षमता विकसित करने के लिए योग प्राणायाम अति आवश्यक है।

भस्त्रिका प्राणायाम के अभ्यास के लिए सर्वप्रथम हम सुखासन पद्मासन में बैठ जाएं दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें और धीरे-धीरे लंबी गहरी श्वास लें और छोड़ें यह अभ्यास 5 मिनट तक करे, भुजंगासन के अभ्यास के लिए हम पेट के वल लेट जाएं दोनों हाथों को पास में रखते हुए लंबी गहरी सांस खींचते हुए दोनों हाथों को कोहनी तक सीधा रखें और नाभी तक शरीर को उठाए।

फिर आसमान की ओर ऊपर देखें कुछ देर रोककर रखे फिर वापस आ जाए, इससे हमें कई शारीरिक व मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं, हमें हमारे दिनचर्या में योग प्राणायाम को अवश्य शामिल करना चाहिए, जिससे हम अस्थमा सहित अन्य बीमारियों से हम बचे रहे।

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