टीम एबीएन, रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव को लगभग तीन महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। इसके बाद भी अब तक भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पाई है। प्रदेश में बजट सत्र की शुरुआत भी हो चुकी है और कल (3 मार्च) हेमंत सोरेन की सरकार विधानसभा में बजट पेश करेगी।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा बजट पेश किया जाएगा, लेकिन विडंबना की बात ये है कि इस बार बिना नेता प्रतिपक्ष के बजट पेश किया जाएगा। कई बैठकें होने के बावजूद भी नेता प्रतिपक्ष को चुना ही नहीं गया है। हालांकि सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि अप्रैल तक नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा, इसके बाद नेता प्रतिपक्ष चुना जाएगा।
बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष का न होना राज्य की राजनीति में बयानबाजी का कारण भी बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि विधानसभा को सुचारु रूप से चलाने में नेता प्रतिपक्ष का भी अहम योगदान रहता है। संवैधानिक नियम के अनुसार विधानसभा की कार्यवाही में नेता प्रतिपक्ष का होना अनिवार्य है।
भाजपा की केंद्रीय कमेटी भी प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष को चुनने में देरी कर रही है। विधानसभा चुनाव के संपन्न होने के बाद झारखंड में कई केंद्रीय नेता आ चुके हैं, लेकिन नेता प्रतिपक्ष का चयन अब तक नहीं हो पाया है।
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