एबीएन सोशल डेस्क। 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के पावन स्नान के साथ प्रयाग महाकुंभ 2025 संपन्न हुआ। इस पावन तिथि को पवित्र त्रिवेणी में स्नान करने का मुझे भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुझे प्रयाग त्रिवेणी महाकुंभ स्नान में अकल्पनीय व अविस्मरणीय अनुभूति मिली। मैंने अनुभव किया कि इस महाकुंभ के महास्नान को भारतवर्ष सहित संपूर्ण संसार के सनातन हिंदू अपने जीवन भर संजोय कर अवश्य रखेगा।
45 दिनों में 64 करोड़ से भी अधिक श्रद्धालुओं के माँ गंगा, यमुना व सरस्वती के त्रिवेणी में स्नान करना मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लगभग 100 करोड़ से अधिक हिंदू सनातनी जनमानस की आस्था का महासागर था। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि विश्व के समस्त सनातन हिंदुओं की आध्यात्मिक ऊर्जा, जाग्रत आत्मविश्वास उत्सव, अनुकरणीय सौहार्द की कड़ी, समरसता का समागम और सामाजिक स्नेह का महासंगम था।
प्रयाग त्रिवेणी में श्रद्धालुओं ने संसार के समस्त जनमानस को यह महसूस कराया कि यह भूमि केवल संतों, ऋषियों और तपस्वियों की ही नहीं, बल्कि हर उस आत्मा की है जो प्रेम और सत्य को धारण करती है। महाकुंभ का विराट आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं का आगमन और उनका कुशल प्रबंधन आज दुनिया के लिए एक आश्चर्य और हम भारतीयों के लिए गौरव का विषय बन गया है।
आज दुनिया को यह आभास कराया की भारतीय सनातन हिंदू संस्कृति संसार के समस्त मानव समुदाय का आध्यात्मिकता की केंद्र है। महाकुंभ के माध्यम से विराट प्रबंधन और अनुशासन का भी अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया गया। महाकुंभ ने संसार के जनमानस को बताया कि हमारी परंपराओं की जड़ें मजबूत हैं, हमारी अतीत की संस्कारें गौरवशाली है और हमारी सांस्कृतिक भविष्य उज्ज्वल है।
हमारी आध्यात्मिकता में विज्ञान, परंपरा में प्रगति और भक्ति में प्रेम देखता है। महाकुंभ हमें पुन: आत्मविश्वास देकर गया है कि हम अपनी विरासत पर गर्व करें, इसे अपनाएं और इसे संसार तक पहुंचाये। मुझे अनुभव हुआ कि त्रिवेणी के पावन स्थल पर जाति-धर्म को दूर छोड़ कर हर कोई बस सनातन संस्कृति के रंग में रंगा हुआ था। कोई अजनबी नहीं बल्कि सब अपने थे।
यह वही भारत है, जो सबको अपनाने और सबको गले लगाने में विश्वास रखता है। महाकुंभ ने हमारी पहचान, हमारी शक्ति, हमारी प्रेम, प्रबंधन कुशलता को एक नई रूप में दुनिया को दिखाया है। वहीं दुनिया को यह बताया कि भारतीय हिंदू संस्कृति में भक्ति हीं विज्ञान है, परंपरा हीं समरसता है और सनातन हीं विश्वबंधुत्व है। (डॉ बिरेन्द्र साहु, झारखण्ड-बिहार विहिप के सहमंत्री हैं।)
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