डीएवी झारखंड जोन-बी एवं जोन-जे के शिक्षकों के लिए दो-दिवसीय शिक्षक संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ

 

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 08 फरवरी,2025 को डीएवी पब्लिक स्कूल झारखंड जोन-बी और जोन-जे के शिक्षकों के लिए दो-दिवसीय शिक्षक संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ आज राजधानी के तीन प्रमुख विद्यालयों—डीएवी पब्लिक स्कूल हेहल, डीएवी पब्लिक स्कूल कपिलदेव और डीएवी पब्लिक स्कूल गांधीनगर में हुआ। इस कार्यशाला में लगभग 700 शिक्षक भाग ले रहे हैं,जिसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों ने शिक्षण के नवीनतम तरीकों पर विस्तृत चर्चा की। 

कार्यशाला का उद्घाटन डीएवी जोन-बी के क्षेत्रीय पदाधिकारी एम के सिन्हा और डीएवी जोन-जे के क्षेत्रीय पदाधिकारी एस के मिश्रा के कर कमलों द्वारा हुआ। उद्घाटन सत्र में एम के सिन्हा ने कहा कि एक सफल शिक्षक वही होता है,जो अपने विषय को छात्रों तक सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचा सके तथा शिक्षा में नवीनता और प्रयोगशीलता ला सके। शिक्षकों को विषय की निपुणता के साथ-साथ उसे प्रायोगिक रूप में प्रस्तुत करने पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। 

डीएवी जोन-जे के क्षेत्रीय पदाधिकारी एस के मिश्रा ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के नैतिक और बौद्धिक विकास का भी माध्यम होनी चाहिए। शिक्षक को स्वयं भी एक सतत् शिक्षार्थी बने रहना चाहिए और आधुनिक शिक्षण तकनीकों को अपनाकर छात्रों को लाभान्वित करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में भी शिक्षक केवल ज्ञान प्रदाता ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शक भी होते थे। आज के समय में शिक्षकों को उसी परंपरा को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ अपनाना चाहिए। 

इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ जंग बहादुर पांडेय ने हिंदी और संस्कृत शिक्षकों को संबोधित किया और आदर्श शिक्षक के गुणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्ञान का प्रसार तभी सार्थक है, जब वह विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में सहायक हो। कार्यशाला में डीएवी विद्यालयों के प्राचार्य डॉ तापस घोष, संजीत मिश्रा, पी के झा, कमलेश कुमार, किरण यादव, एस के पाठक, बबुन शरण, रोशी बाधवानी, मनोजेश्वर कुमार सहित कई डीएवी विद्यालयों के मास्टर ट्रेनर उपस्थित रहे।  

इस कार्यशाला के दौरान शिक्षकों को शिक्षण के प्रभावी और रोचक तरीकों, शिक्षा में नये प्रयोगों और छात्रों के सर्वांगीण विकास से संबंधित महत्वपूर्ण सत्रों में भाग लेने का अवसर मिला। डीएवी प्रबंधन समिति के शिक्षा विभाग का मानना है कि शिक्षा में नवीनता और प्रयोगशीलता शिक्षकों के लिए आवश्यक है, जिससे वे छात्रों को अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षित कर सकें। कार्यशाला का समापन दिनांक 09.02.2025 को विभिन्न प्रशिक्षण सत्रों के साथ होगा, जिसमें शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों और विधियों से अवगत कराया जाएगा, जिससे वे अपने शिक्षण कौशल को और अधिक निखार सकें, जिससे सत्र 2025-26 बेहतर बनेगा।

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