एबीएन न्यूज नेटवर्क, खूंटी। आज दिनांक 8 फरवरी 2025 दिन शनिवार को नागपुरी विभाग की ओर से बिरसा कॉलेज खूंटी में प्रफुल्ल जयंती सह नागपुरी दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ की गयी। इस अवसर पर प्रफुल्ल कुमार राय को श्रद्धांजलि दी गयी। मौके पर नागपुरी भाषा साहित्य पर विचार गोष्ठी का भी आयोजन हुआ।
इस अवसर पर नागपुरी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ कोरनेलियुस मिंज ने कहा कि नागपुरी बहुत ही प्राचीन और समृद्ध भाषा है। इसकी मधुरता लोगों को अपनी ओर बरबस खींच ही लेती है। यह संपर्क भाषा के रूप में स्थापित है। इसका साहित्य भी बहुत समृद्ध है। प्रफुल्ल कुमार राय का नागपुरी साहित्य के संवर्धन में बहुत ही अहम योगदान है।
प्रफुल्ल कुमार राय आधुनिक नागपुरी साहित्य के जनक हैं, जिन्होंने गद्य विधा में आधुनिक लेखन की शुरुआत की। आधुनिक नागपुरी कहानी लेखन की शुरुआत इन्हीं से मानी जाती है। इनकी कहानियों और कविताओं में आधुनिकता का बोध मिलता है। आधुनिक पीढ़ी को प्रफुल्ल कुमार राय से प्रेरणा लेकर नागपुरी साहित्य को समृद्ध करने के लिए कलम चलाने की जरूरत है।
अभी भी नागपुरी साहित्य में नाटक, उपन्यास, संस्मरण, जीवनी, व्यंग्य, रेखा चित्र आदि विधाओं में लेखन कार्य करने की जरूरत है क्योंकि इन विधाओं में अभी भी बहुत कम रचनाएं हुई हैं। इस अवसर पर कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या जे किड़ो ने कहा कि प्रफुल्ल कुमार राय को उनके कार्यों से जाना जाता है। उनकी नागपुरी की उम्दा रचनाओं ने साहित्य को समृद्ध किया है। हमें उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाषा संस्कृति का संरक्षण संवर्धन भी जरूरी है।
इस अवसर पर नागपुरी के लिए समर्पित रहने वाले महामहिम उपाधि प्राप्त नागपुरी साहित्यकार कर्रा के स्वर्गीय विंध्येश्वरी मिश्र, कर्रा के ही वादक, गीतकार गोपाल चंद्र देवघरिया और खूंटी के साहित्यकार स्वर्गीय शिव अवतार चौधरी शिवाजी को नागपुरी सेवा सम्मान प्रदान किया गया। इनका जीवन नागपुरी के लिए समर्पित रहा। इसे देखते हुए नागपुरी सेवा सम्मान बिरसा कॉलेज के नागपुरी विभाग की ओर से दिया गया। सम्मान विंध्यश्वरी मिश्र की धर्म पत्नी ललिता देवी, शिव अवतार चौधरी के बड़े पुत्र अरुण चौधरी ने प्राप्त किया।
गोपाल चन्द्र देवघरिया ने खुद सम्मान ग्रहण किया। मौके पर विंध्यश्वरी मिश्र के बड़े पुत्र ओम प्रकाश मिश्र ने अपने पिताजी से जुड़े संस्मरण को साझा करते हुए कहा कि रात को जब तब उठकर रचना करते थे। उनमें जुनून था लेखन के प्रति। उन्होंने विद्यार्थियों से किसी भी काम को जुनून से काम करने की नसीहत दी। मौके पर शिव अवतार चौधरी शिवाजी के बड़े पुत्र अरुण चौधरी ने कहा कि मेरे पिताजी वकालत करते हुए नागपुरी साहित्य के संवर्धन में अपना बहुमूल्य योगदान दिया है। इनकी चार पुस्तकें कुछ ओस कुछ अंगोर, महादान, असुर कन्या और क्रांति रथी प्रकाशित है।
इस अवसर पर परीक्षा नियंत्रक डॉ पुष्पा सुरीन, बर्रसर पूनम माई तियु, लाइब्रेरी इंचार्ज डॉ मंजूषा पूर्ति, मुंडारी विभाग की सावित्री कुमारी, डॉ संध्या कुमारी, डॉ सिजरेन सुरीन ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम में गणित के सहायक प्राध्यापक तारीफ लुगुन, डॉ अस्मृता महतो, डॉ शीला कुमारी, डॉ रेश्मा रेनी तोपनो, जितन कुमारी सहित कर्मचारी, नागपुरी विभाग के विद्यार्थी बसंत कांसी, प्रीतम कुमार, मनीष नाग, मुकेश राम, दीपक बैठा, चैतु केरकेट्टा, लक्ष्मी कुमार, रोहित खाखा, मनीषा कुमारी, गूंजा कुमारी, नेहा कुमारी, रीता टोप्पो, पुष्पा कुमारी, निक्की कुमारी, जुली कुमारी, मीना, सुमन, जीतन, अंजू कुमारी, संध्या, रुक्मणि, नीलम और मुंडारी तथा भूगोल के विद्यार्थी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ कोरनेलियुस मिंज और धन्यवाद ज्ञापन नागपुरी विभाग सहायक प्राध्यापक सुनिता टोप्पो ने किया।
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