टीम एबीएन, रांची। डी ए वी पब्लिक स्कूल सीसीएल गांधीनगर में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, मध्यप्रदेश, बंगाल, नेपाल आदि तक डी ए वी स्कूलों के संस्थापक एवं विस्तारक महान शिक्षाविद् महात्मा एन डी ग्रोवर की 17वीं पुण्यतिथि मनायी गयी। मौके पर विशेष प्रार्थना सभा सह यज्ञ का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों के साथ विद्यालय के सभी छात्र उपस्थित थे। प्राचार्य प्रदीप कुमार झा ने अपने संदेश में कहा कि ग्रोवर साहब युग पुरुष थे। शिक्षा के क्षेत्र में किए गए उनके प्रयास अतुल्य हैं। उन्होंने एक निस्वार्थ कर्मयोगी की तरह डी ए वी संस्थाओं के उन्नयन में अनुपम योगदान दिया है।
श्रीनिराकार आचार्या ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग्रोवर साहब निष्काम कर्मयोगी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा के लिए अर्पित कर दिया। उन्होंने शिक्षा के सौ से अधिक पावन मंदिरों की स्थापना की छात्रों ने जहां दस लाख से अधिक विद्यार्थी ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। एक अकिंचन साधनहीन व्यक्ति भी असंभव को संभव कैसे बना सकता है, इस बात के वे प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
उनके जीवन का प्रत्येक कर्म समाज के लिए प्रेरणा है।उनका चरित्र वर्णन से परे है। विद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ। वैद्यनाथ मिश्र ने उनके जीवन से संबंधित कई संस्मरणों को छात्रों के साथ साझा किया। शिक्षकों के अलावे नवम वर्ग की छात्रा मानसी एवं शौर्यदीप ने भी अपने भाषणों के द्वारा उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रजेशजी सिन्हा, के नलिनी, एस एम वसुधा, सोमा घटक, संध्या रानी, गोविंद झा, पूर्णचंद्र आर्य कविता मुखर्जी आदि की भूमिका रही।
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