हिंदू स्वाभिमान का प्रतीक है श्रीराम जन्मभूमि मंदिर : डॉ बिरेन्द्र साहु

 

टीम एबीएन, रांची। सनातन हिन्दू सांस्कृतिक अवधारणाएं ही भू-धरा पर समस्त जीवों के कल्याण की चिंतन करने वाला एकमात्र परंपरा है। विश्व गुरु के रूप में विद्यमान भारतीय संस्कृति सदैव से विश्व को पथ-प्रदर्शित करता रहा है। यह परंपरा सदैव निर्वाध रूप से चलते रहे, इसके लिए दानव वृत्ति लोगों से देवतुल्य जनमानस को संघर्ष करता रहना पड़ा है। 

भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी असुरीशक्ति को समाप्त कर सत्य रूपी रामराज की स्थापना की थी। भगवानराम के प्रति सनातन परंपरा के जनमानस को अटूट श्रद्धा एवं विश्वास सदैव से रहा है, परंतु इस विश्वास को तोड़ने के लिए 1528 ई में अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम जन्मभूमि पर बने भव्य मंदिर को अक्रांताओं के द्वारा क्षति पहुंचाकर हिंदू पौरुष को ललकारा गया था। 

इस जन्मभूमि को विवादित कर यहां पर पूजन व्यवस्था पर विघ्न डाला गया था। इसे मूल रूप में पुन: प्राप्त करने के लिए 76 संघर्षों में लगभग साढ़े चार लाख सनातन हिंदू जनमानस के बलिदान के बाद गीता जयंती तदनुसार 6 दिसंबर, 1992 को हिंदू समाज ने अपने माथे में लगे कलंक को धो डाला था। 

लंबी न्यायायिक प्रक्रिया के बाद विगत पौष शुक्ल द्वादशी तदानुसार 22 जनवरी, 2024 को यशस्वी प्रधानमंत्री व देश के समग्र पंथ-संप्रदाय के साधु-संतों की नेतृत्व में भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम लला का भव्य एवं अलौकिक नूतन मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा किया गया। इस प्राण प्रतिष्ठा के दृश्य को देखकर भारतवर्ष ही नहीं अपितु पूरा संसार आनंदित, हर्षित, उल्लासित व गौरवान्वित हुए थे। 

समस्त विश्व के हिंदू समाज ने भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म स्थल पर पुण: प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को भव्य दीपावली के रूप में मनाकर अपनी अटूट श्रद्धा एवं विश्वास को दशार्या था। उक्त बातें विश्व हिंदू परिषद, झारखंड-बिहार के सहमंत्री डॉ बिरेन्द्र साहु ने कही। 

डॉ साहु ने समस्त हिंदू जनमानस से आह्वान किया है कि इस पावन गौरव के छण व हिंदू पौरुष को अविस्मरणीय बनाये रखने के लिए हिंदू स्वाभिमान के प्रतीक श्रीराम जन्मभूमि में स्थापित श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा के द्वितीय वर्षगांठ पर पौष शुक्ल द्वितीया तद्नानुसार 11 जनवरी, 2025 को प्रत्येक मंदिरों घरों में अवश्य भगवा झंडा  लहरायेंं, हनुमान चालीसा पाठ करें, श्रीरामचरित मानस पाठ करें, भजन कीर्तन का अनुष्ठान करें  दीपोत्सव मनावें, महाआरती करें, प्रसाद भोग चढ़ावे एवं प्रसाद ग्रहण करें।

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