टीम एबीएन, रांची। आज 8 जनवरी 2025 को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा रांची के बैनर तले अमर शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह के 168 वाँ शहादत दिवस मनाया एवं माल्यार्पण किया।
मौके पर जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो दोनों वीरों को खिराज -ए - अकीकत पेश करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति ने आजादी की चिंगारी को सम्पूर्ण देश भर में सुलगा दिया था, जिससे छोटानागपुर के पहाड़ पर्वत भी धधक उठा था।
लॉर्ड डलहौजी के जुल्म से बेबस होकर 1857 आजादी का क्रांति में झारखंड में आजादी का बिगुल बजाने वाले शहीद शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह ने झारखंड की राजधानी रांची और उसके आस पास के क्षेत्रों को आजाद करा दिया और रामगढ़ छावनी पर हमला बोल दिया तथा अंग्रेजों को मार भगाया।
वहां से सफलता मिलते ही दोनों चाईबासा की तरफ अपने सेना के साथ कुचकर वहां के डिप्टी कमिश्नर का हत्या कर दी। इसके बाद शेख भिखारी संथाल परगना की और कुच कर गये थे दुमका में भीषण युद्ध हुआ था। युद्ध में विजय प्राप्त कर दुमका से फिर दोनों रांची वापस आये थे।
जीत घोषित होने के उपलक्ष्य में तत्कालीन राजा विश्वनाथ शाहदेव डोरंडा के एक से सात नवंबर 1857 तक विजय का जश्न मनाया था। तब अंग्रेज नाराज होकर दानापुर छावनी से काफी संख्या में सेना और अस्त्र शस्त्र लेकर आए, शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह का अड्डा चुटूपालू घाटी में जमकर जंग हुई।
जब शेख भिखारी के पास से गोली बारूद खत्म हुआ तो पत्थर का टुकड़ा गिराने लगे जिसमें अनेकों अंग्रेज सैनिक मर गए थे। तभी अंग्रेजी सेना के कमांडर मैकडोनाल्ड ने शेख भिखारी तक पहुंचने का गुप्त रास्ता का पता लगाया और टिकैत उमराव सिंह के साथ दोनों को पकड़ लिया।
शेख भिखारी और टिकैत उमराव सिंह दोनों का खौफ इतना भयानक था कि उसी घाटी पर बिना मुकदमा चलाये 8 जनवरी 1858 ई0 को सार्वजनिक फांसी दी गई। जो घटना पूरा इतिहास को झकझोर के रख दिया है। 1857 के आजादी क्रांति में तांत्या टोपे, मंगल पांडे, नादिर अली समेत चतरा में 150 क्रांतिकारियों को फांसी दिया गया था, 77 क्रांतिकारियों को एक ही गड्डे में दफनाया गया था।
रानी लक्ष्मीबाई युद्ध के दौरान शहीद हो गई थी, वीर कुंवर सिंह को जंग के मैदान से लगी चोट से शहीद हुए थे, बहादुर शाह जफर को देशद्रोह का मुकदमा कर बर्मा में निर्वासन का सजा सुनाया गया था नाना साहेब, बेगम हजरत महल, मौलवी अहमदुल्ला शाह ऐसे अनेकों ने बलिदान दिया था।
कार्यक्रम के मौके पर देवेंद्र नाथ महतो, चंदन रजक, अयूब अली, रविन्द्र, अजहर अजरूद्दीन, इरशाद आलम, शाहिद भाई, सोएल अहमद, साबी, अरशद साह, प्रदीप, के अलावा अन्य लोग शामिल हुए।
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