श्रीमद् भागवत गीता कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं का लगा रहा तांता

 

  • कृष्ण-सुदामा के मार्मिक प्रसंग से पूरा मंदिर परिसर आनंदित भाव-विभोर हो उठा
  • मनुष्य अपने प्रत्यक्ष अनुभव और अनुमान के द्वारा अपने हित अहित का निर्णय करने में समर्थ है : स्वामी सदानंद महाराज

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा- धाम मंदिर में तीसरे दिन भी भगवान श्री राधा- कृष्ण के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर में आयोजित चार दिवसीय श्रीमद् भागवत गीता कथा के तीसरे दिन संत शिरोमणि स्वामी सदानंद जी महाराज ने उद्धव चरित्र रुक्मणी विवाह एवं कृष्ण सुदामा लीला की मार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया। कथा की अमृत वर्षा स्वामी जी के मुखारविंद से भक्तों ने श्रवण किया।

श्रीमद् भागवत कथा का तीसरा दिन श्रीमद् भागवत कथा के यजमान सुनीता अग्रवाल, राजू अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, विजय अग्रवाल सपरिवार एवं संस्था के सदस्यों ने बड़े ही प्रेम भाव से श्रीमद्भागवत का पूजन तथा स्वामी श्री सदानंद जी महाराज को माल्यार्पण चंदन-वंदन कर उपस्थित सभी श्रद्धालु भक्तों के साथ श्रीमद् भागवत की आरती की। 

श्रीमद् भागवत कथा व्यास पीठ पर आसीन संत सदानंद जी महाराज ने हुए कहा कि दुख- सुख को समझने वाले जिस धैर्यवान पुरुष को एक इंद्रियों के विषयों के संजोग व्याकुल नहीं करते वह मोक्ष के योग्य नहीं है। महाराज जी ने भगवान श्री कृष्ण के प्रति गोपियों के हृदय में प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि उद्धव से ज्ञानी को भी कहना पड़ा यह गोपियों तू धन्य हो तुम्हारा जीवन सफल है और तुम सारे संसार के लिए पूजनीय हो क्योंकि तुम लोगों ने इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण को अपना हृदय अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया है। नंद बाबा के ब्रज में रहने वाले गोपांगनाओ चरण धूलि को मैं बार-बार प्रणाम करता हूं।

भगवान श्री कृष्ण की अद्भुत लीलाएं सागर में द्वारकापुरी निर्माण कर वास किया। एक- एक कर 8 विवाह किया और एक ही मुहूर्त में 16100 कन्या से विवाह किया इतने बड़े परिवार में बड़े आनंद पूर्वक रहते थे। भगवान श्रीकृष्ण के परम मित्र एव अंतरंग सखा सुदामा जी थे। जिनकी कथा जग प्रसिद्ध है श्री सुदामा जी के एक मुट्ठी चावल के बदले अपना जैसा वैभव प्रदान किया। 

भगवान संतों को महिमा गायन करते हुए कहा कि केवल जग में तीर्थ तीर्थ नहीं कहलाते हैं और केवल प्रतिमाएं ही देवता नहीं होती है संतोषी वास्तव में तीर छोड़ देता है क्योंकि उनका बहुत समय तक सेवन किया जाता पुण्य मिलता है प्रदूषण पुरुषों का तो दर्शन मात्र से कृतार्थ कर देते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने उद्धव को ज्ञान उपदेश करते हुए कहा कि संसार मे जो भी मानव यह जगत क्या है इसमें क्या हो रहा है। इत्यादि बातों पर विचार करने में निपुण है वह चीत में भरी हुई अशुभ वासनाओं से अपने आपको स्वयं अपने विवेक शक्ति से प्राय बचा लेते हैं। 

समस्त प्राणियों मे विशेष कर मनुष्य अपने प्रत्यक्ष अनुभव और अनुमान के द्वारा अपने हित अहित का निर्णय करने में समर्थ है। यदि कोई दुष्टों की संगति में पड़ कर अधर्म करने लग जाये। अपने इंद्रियों के बस में हो कर मनमानी करने लगे तो वह नरक में जाता है। भक्ति की प्राप्ति सत्संग से होती है जिसे भक्ति प्राप्त हो जाती है वही भगवान की उपासना करता है। कृष्ण- सुदामा के मार्मिक प्रसंग तथा कृष्ण सुदामा के मिलन पर पूरा मंदिर परिसर आनंदित भाव-विभोर हो गया। कथा के दौरान कलाकारों द्वारा कई प्रसंगों पर जीवंत अद्भुत झांकियां प्रस्तुत की। 

मनमोहक एवं आकर्षक  झांकियां देखकर भक्तजन आनंद लेते हुए खूब झूमे, पूरा परिसर श्री कृष्ण के जयकारों से गुंजायमान हो गया। पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रीमद् भागवत कथा मे स्वामी टहल किशोर महाराज, स्वामी श्यामानंद महाराज, जगत राज महाराज, स्वामी मोहन प्रियाचार्य जी महाराज द्वारा  अमृत कथा, वाणी चर्चा एवं बीतक कथा तथा सुंदर सुमधुर भजनों का श्रवण करा कर सभी भक्तों को आनंद विभोर कर दिया। महाआरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का समापन हुआ। शीश महल मे विराजे भगवान श्री राधा-कृष्ण का दर्शन कर हजारों श्रद्धालुओं मे बड़े ही उत्साह एवं उमंग का माहौल था। 

उक्त जानकारी देते हुए ट्रस्ट के मीडिया प्रभारी संजय सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम में साध्वी मीणा महाराज, साध्वी पूर्णा महाराज, ट्रस्ट के अध्यक्ष डूंगरमल अग्रवाल, उपाध्यक्ष निर्मल जालान, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, सचिव मनोज चौधरी, नवल अग्रवाल, सज्जन पाड़िया, विजय अग्रवाल, संजय सर्राफ, ओम सरावगी, निर्मल छावनिका, विष्णु सोनी, मनीष जालान, विशाल जालान, नंदू चौधरी, पूरणमल सराफ, सुरेश चौधरी, सुरेश भगत, शिव भगवान अग्रवाल, सुनील पोद्दार, चिरंजी लाल खंडेलवाल,विनय कुमार, पवन तिवारी,रवि कुमार, श्रवण कुमार,प्रेमचंद श्रीवास्तव, अशोक लाठ, अनिल अग्रवाल, मनीष सोनी, अजय खेतान, मोहनलाल खंडेलवाल, वेंकट गाड़ोदिया, नितिन मोदी, जयप्रकाश मित्तल, गोविंद अग्रवाल, शिव पोद्दार, सुरेश अग्रवाल, विधा देवी अग्रवाल, अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, सरिता अग्रवाल, संतोष देवी अग्रवाल, शोभा अग्रवाल, विमला जालान, पुनम अग्रवाल, ललिता पोद्दार, चंदा देवी अग्रवाल, सुमन चौधरी, सीमा अग्रवाल, पूजा अग्रवाल, वंदना अग्रवाल, श्वेता अग्रवाल, सहित बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित थे।

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