एबीएन डेस्क। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने चीन को लेकर होश उड़ाने वाली एक ऐसी रिपोर्ट जारी की है जिसमें भारत के खिलाफ प्लान का भी खुलासा किया है। रिपोर्ट में चीन के सैन्य मिशन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में बढ़ते प्रभाव से लेकर नए समय में शुरू की गई उसकी योजनाओं तक, हर चीज के बारे में बताया गया है। इसमें ताइवान संकट, भारत चीन सीमा तनाव के साथ-साथ पिछले साल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा आयोजित बहुपक्षीय अभ्यासों के पैटर्न पर विस्तृत डाटा भी शामिल है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन नहीं चाहता कि अमेरिका के साथ भारत के रिश्ते बेहतर हों और वह इसके लिए भारत को हर कीमत पर रोकना चाहता है। भारत के साथ सीमा पर तनाव कम करने के दावे हकीकत से परे : पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन के भारत के साथ सीमा पर तनाव कम करने के दावे हकीकत से परे हैं। दरअसल राजनयिक और सैन्य बातचीत के बावजूद चीन ने भारत के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपने दावों को साबित करने के लिए ‘सामरिक कार्रवाई करना’ जारी रखा है। इसके साथ ही उसने भारत को अमेरिका के साथ अपने संबंधों को गहरा करने से रोकने की भी पूरी कोशिश की। पेंटागन ने नियमित रूप से पूर्वी लद्दाख में भारत-चीनी सैन्य गतिरोध पर अमेरिकी कांग्रेस को सोौंपी रिपोर्ट में कहा कि चीन अपने पड़ोसियों खासतौर पर भारत के साथ आक्रामक व्यवहार कर रहा है। अपने पड़ोसियों को डराने के लिए चीन ने तिब्बत और शिंजियांग में मौजूद सुरक्षा बलों को पश्चिमी चीन भेज दिया ताकि उनकी सीमा पर तैनाती हो सके। चीन ने LAC क्षेत्र में 100 घरों का गांव बसाया : पेंटागन ने पुष्टि की है कि साल 2020 में चीन ने LAC के पूर्वी क्षेत्र में चीनी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य के बीच “विवादित क्षेत्र” में 100 घरों का गांव बसाया है। इसी साल जब भारत के साथ तनाव चरम पर पहुंच गया तो भी चीन नहीं रुका। उसने पश्चिमी हिमालय के दूरदराज के इलाकों में एक फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क स्थापित किया, ताकि आसानी से संचार व्यवस्था को सुधारकर विदेशी हस्तक्षेप को रोका जा सके. रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना के फील्ड कमांडरों को इससे काफी फायदा मिला। इस दौरान इन्हें रीयल टाइम आईएसआर और अन्य जरूरी डाटा पर नजर बनाए रखने में मदद मिली. इससे फैसले लेने और कम वक्त में प्रतिक्रिया देने में आसानी होती है। चीन के हथियार कम गुणवत्ता व विश्वसनीयता : पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार चीन के बनाए हुए हथियार खरीदने वाले उसके ग्राहकों का मानना है कि ये कम गुणवत्ता व विश्वसनीयता वाले होते हैं लेकिन फिर भी कुछ देश सस्ते होने के कारण ये हथियार खरीदते हैं। चीन की विदेश नीति में हथियारों का हस्तांतरण बेहद अहम है, जिसका इस्तेमाल चीन की ‘वन बेल्ट, वन रोड’ रणनीति के हिस्से के रूप में की गई पहलों के लिए अन्य प्रकार की सहायता के साथ किया जाता है। बीजिंग सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान जैसे देशों को यूएवी, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान जैसे प्रमुख सिस्टम बेचता है। उसने पाकिस्तान, इराक, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, सर्बिया और कजाकिस्तान को विंग लूंग यूएवी की सप्लाई भी की है।
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