रांची। नियुक्ति वर्ष में पांच लाख युवाओं को रोजगार देने के वायदे से केवल पंचायत सचिव परीक्षा सहित अन्य उम्मीदवार ही नहीं ठगे गये हैं, बल्कि इस लिस्ट में राज्य के वैसे उम्मीदवार भी शामिल हैं जो झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षक बनने की पात्रता ले सकें इसके लिए ये उम्मीदवार पिछले पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। इन उम्मीदवारों को भी सरकार से एक ही जवाब मिल रहा है कि नियमावली में संशोधन के बाद परीक्षा होगी। यानी अब तक जेटेट भी नियमावली की पेंच में फंसा हुआ है। राज्य में आरटीइ के लागू होने के बाद दो बार परीक्षा ली गयी है। पहली परीक्षा साल 2013 में हुई। वहीं दूसरी परीक्षा 2016 में हुई। दोनों ही परीक्षा दो अलग-अलग नियमावली से ली गयी। अब तक राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए दो बार नियमावली बन चुकी है। पहली नियमावली वर्ष 2012 में बनी। इसके बाद 2016 में दूसरी नियमावली बनी। तीसरी शिक्षक पात्रता परीक्षा लेने को लेकर साल 2019 में तीसरी बार नियमावली बनी। यह नियमावली बनते ही विवादों में आयी। फिर इसमें संशोधन शुरू हुआ, जो अब तक चल ही रहा है। नियमावली बनते और संशोधन होते एक साल से अधिक होने को हैं। राज्य में वर्ष 2019 में शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली बनायी गयी थी। नियमावली तैयार होने के बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने परीक्षा लेने संबंधित प्रस्ताव झारखंड एकेडमिक काउंसिल को भेजा था। काउंसिल ने नियमावली के कुछ बिंदुओं पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से दिशा-निर्देश मांगा था, जिसके बाद विभाग की ओर से इसमें संशोधन की प्रक्रिया शुरू की गयी। यह संशोधन विषय के अंकों में एकरूपता नहीं होने की वजह से किया जा रहा है। वर्ष 2019 में बनायी गयी नियमावली में विभिन्न विषयों के अंकों में एकरूपता नहीं थी। कक्षा छह से आठ में सामान्य शिक्षक के लिए भाषा की 50 अंक की परीक्षा में 25 अंक की परीक्षा अंग्रेजी विषय से और 25 अंक की परीक्षा हिंदी/संस्कृत का लेने का प्रावधान है। जबकि उर्दू शिक्षक के लिए 30 अंक की अंग्रेजी व 20 अंक की उर्दू की परीक्षा लेने का प्रावधान है। अब उर्दू शिक्षक के लिए भी 25 अंक की उर्दू व 25 अंक की अंग्रेजी की परीक्षा ली जायेगी। इसी प्रकार कक्षा छह से आठ में विज्ञान शिक्षक नियुक्ति में भी विषयों के अंक निर्धारण में बदलाव किया जायेगा। विज्ञान शिक्षक के लिए ली जानेवाली परीक्षा में गणित के लिए 70 अंक निर्धारित किये गये हैं। वहीं भौतिकी, रसायन, वनस्पति शास्त्र व जीव विज्ञान के लिए 40-40 अंक निर्धारित किये गये हैं। अब इनमें भी बदलाव किया जायेगा एवं सभी विषयों के अंक में एकरूपता लायी जायेगी। शिक्षा सचिव राजेश शर्मा ने बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से संशोधन का प्रारूप तैयार कर भेज दिया गया है। अभी उम्मीदवारों को इंतजार करना होगा। वहीं प्राथमिक शिक्षा निदेशालय से मिली जानकारी के अनुसार संसोधित नियमावली को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है।
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