एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि रक्षाबंधन हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति का अत्यंत पवित्र एवं भावनात्मक पर्व है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व केवल राखी बांधने और उपहार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार, संस्कार, सामाजिक समरसता और रिश्तों की गरिमा को मजबूत करने का संदेश देता है।
इस वर्ष रक्षाबंधन 28 अगस्त दिन शुक्रवार को मनाया जायेगा। रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर रोली या चंदन का तिलक लगाकर आरती उतारती है और उसकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसके सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करती है। भाई भी बहन की रक्षा, सम्मान और हर परिस्थिति में साथ निभाने का संकल्प लेता है। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं और उपहार देकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं।
राखी का यह छोटा-सा धागा वास्तव में भावनाओं और जिम्मेदारियों का मजबूत बंधन माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से रक्षाबंधन का विशेष महत्व है। इस पर्व से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा विशेष रूप से लोकप्रिय है। मान्यता है कि एक अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था।
श्रीकृष्ण ने उनके इस स्नेह को रक्षा-संकल्प के रूप में स्वीकार किया और संकट के समय द्रौपदी की रक्षा की। इसी प्रकार इंद्र और इंद्राणी से जुड़ी कथा भी रक्षासूत्र की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करती है। माता लक्ष्मी द्वारा राजा बलि को रक्षासूत्र बांधने की कथा भी रक्षाबंधन से जोड़ी जाती है। रक्षाबंधन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पर्व रक्त संबंधों से आगे बढ़कर प्रेम, संरक्षण, सम्मान और मानवीय संवेदना का संदेश देता है।
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गयी है। यह पर्व परिवारों को एकजुट करता है और नयी पीढ़ी को भारतीय संस्कारों एवं पारिवारिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है। रक्षाबंधन का उद्देश्य केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा करना नहीं, बल्कि दोनों के बीच परस्पर सम्मान, सहयोग और विश्वास को मजबूत करना है।
आज बहनें भी भाइयों के साथ हर सुख-दुख में खड़ी रहती हैं और परिवार तथा समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए रक्षाबंधन को परस्पर सुरक्षा और सम्मान का संकल्प पर्व कहना अधिक सार्थक है। इस दिन राखी की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी सजाकर विधिपूर्वक पूजा की जाती है।
वास्तव में रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का प्रतीक है, जिसमें रिश्ते केवल अधिकार से नहीं, बल्कि कर्तव्य, प्रेम, त्याग और विश्वास से मजबूत होते हैं। आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच यह पर्व हमें अपने परिवार और प्रियजनों के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश देता है। यही कारण है कि सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा, उल्लास और आत्मीयता के साथ मनायी जाती है।
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