टीम एबीएन, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 13 से 15 मार्च तक हरियाणा के समालखा में हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर के 46 प्रांतों से 1438 जिसमें झारखंड से 31 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभा में संगठन विस्तार, सामाजिक समरसता, राष्ट्रहित में सज्जन शक्ति की सक्रियता तथा संघ के शताब्दी वर्ष को ध्यान में रखते हुए भविष्य की व्यापक कार्ययोजना (रोडमैप) पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
प्रांत कार्यवाह संजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस अवसर पर संत शिरोमणी रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष के उपलक्ष्य में मा. सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य पढ़ा गया। संदेश में वर्तमान समय में सक्रिय विभाजनकारी प्रवृत्तियों के बीच संत रविदास जी के एकात्मता, समरसता और सामाजिक सौहार्द के विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया।
उन्होंने बताया कि संघ का कार्य निरंतर विस्तार की दिशा में अग्रसर है। वर्तमान में देशभर में 55,683 स्थान में शाखा,मिलन व मंडली की संख्या बढ़कर 1,34,766 हो गयी है तथा संघ का कार्य अब अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख जैसे दूरस्थ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। यह विस्तार न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्र की एकात्मता और सांस्कृतिक एकरूपता को भी सुदृढ़ करता है।
झारखंड के संदर्भ में उन्होंने बताया कि राज्य में 1050 से अधिक स्थानों पर नियमित गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें शाखा, मिलन व मंडली 1513 है। राज्य के 4 महानगर 89 नगरों व 519 बस्ती में शाखा कार्य सक्रिय है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 8 विभाग, 24 जिलों, 258 खंडों एवं 1,264 मंडलों के 786 मंडल में संगठन का कार्य विस्तार प्राप्त कर चुका है।
प्रांत कार्यवाह ने कहा कि संघ केवल संख्यात्मक विस्तार पर ही नहीं, बल्कि कार्य की गुणवत्ता और प्रभाव पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली तथा नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे विषय शामिल हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व एक जीवनशैली है, जो समाज में श्रेष्ठ मूल्यों का संवर्धन करती है, और सज्जन शक्ति को राष्ट्रहित में संगठित करना समय की प्रमुख आवश्यकता है। सभा में वैचारिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, जिसमें भारतीय दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने, औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति पाने तथा समाज जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने पर बल दिया गया।
साथ ही, समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बढ़ाने के लिए व्यापक जनसंपर्क और जन-जागरण अभियानों की रूपरेखा तैयार की गयी। महापुरुषों के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि गुरु तेग बहादुर जी के 350वें बलिदान वर्ष के अवसर पर देशभर में 2,000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किये गये, जिनमें लगभग 7 लाख लोगों की सहभागिता रही। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ भी बड़े उत्साह के साथ मनायी गयी।
आगामी समय में संत रविदास जी के 650वें प्राकट्य वर्ष पर भी व्यापक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। संघ शिक्षा वर्गों की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्राथमिक वर्ग 28 स्थानों पर आयोजित हुए, जिनमें 870 शिक्षार्थियों ने भाग लिया। एक सामान्य वर्ग में 247 शिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया। आगामी समय में 96 प्रशिक्षण वर्ग (11 क्षेत्रीय एवं नागपुर सहित) आयोजित किए जाएंगे।
झारखंड में 26 मई 2026 से जमशेदपुर में संघ शिक्षा वर्ग (सामान्य )वर्ग संपन्न होंगे इसी विभाग में उत्तर पूर्व क्षेत्र के संघ शिक्षा वर्ग (विशेष वर्ग) भी संपन्न होंगे। संघ शताब्दी वर्ष के अंतर्गत भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। श्री विजयादशमी उत्सव देश भर में 62555 उत्सव जिसमें 3245141 स्वयंसेवक सहभागी हुए संचलन 22656 स्थान पर गणवेश में 2545818 स्वंयसेवक सहभागी हुए।
झारखंड प्रांत में भी 1879 स्थान पर कुल 31638 स्वयंसेवकों की सहभागिता रही वहीं 390 संचलन पूर्ण गणवेश में निकले जिसमें 30976 स्वयंसेवक उपस्थित थे। गृह संपर्क अभियान के माध्यम से 17194 ग्राम में पंच परिवर्तन के विषय को लेकर गृह संपर्क किया गया, जिसमें 2797357 परिवारों से संपर्क हुआ, इस कार्य हेतु 35813 कार्यकर्ता लगे।
शत-प्रतिशत गांवों तक पहुंच बनायी गयी, जो संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में पु.सरसंघचालक एवं सरकार्यवाह का झारखंड प्रवास भी हुआ। 12 जनवरी को सरकार्यवाह की उपस्थिति में चार सत्रों में सामाजिक सद्भाव बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के विभिन्न जाति- बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस दौरान समाज में व्याप्त विसंगतियों एवं समस्याओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई। साथ ही संत-महात्माओं एवं सामाजिक-आध्यात्मिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श करते हुए सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अध्यात्म के माध्यम से सामाजिक चेतना के विस्तार तथा समाज के सभी वर्गों तक पहुंच बढ़ाने जैसे विषयों पर गहन चिंतन किया गया।
इसके अलावा झारखंड प्रांत के 281 खंड व नगरों मे यह बैठक आयोजन हुआ इस बैठक में 29680 विभिन्न जाति - बिरादरी, संत-महात्मा सहभागी हुए।
इसके अतिरिक्त, 24 जनवरी को प.पु.सरसंघचालक के उपस्थिति में जनजाति संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जो दो सत्रों में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में 800 से अधिक जनजाति समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें धर्मांतरण, सरना धर्म, जनजातीय संस्कृति की रक्षा एवं संवर्धन जैसे विषयों पर गंभीर और सकारात्मक चर्चा की गयी। इस प्रकार, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा 2026 न केवल संगठनात्मक समीक्षा का मंच बनी, बल्कि आने वाले समय में राष्ट्र और समाज के समग्र विकास हेतु दिशा निर्धारित करने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी सिद्ध हुई।
प्रांत कार्यवाह संजय कुमार ने आगामी भारतीय नव वर्ष व प्रकृति पर्व सरहुल, रामनवमी की अनंत शुभकामनाएं दी। आज के पत्रकार वार्ता में उत्तर पूर्व के क्षेत्र संघचालक मा.देवव्रत पाहन, झारखंड प्रांत के सह प्रांत संघचालक मा.अशोक कुमार श्रीवास्तव जी रांची विभाग के प्रचार प्रमुख श्री विवेक जी, रांची महानगर के प्रचार प्रमुख स्निग्ध एवं सह प्रचार प्रमुख शिवेंदु सागर उपस्थित थे।
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