लोगों को सता रहा घरेलू रसोई गैस की किल्लत का डर!

 

गैस एजेंसियों पर उमड़ी भीड़, होटलों ने दी बंद होने की चेतावनी 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम एशिया में युद्ध और होर्मुज संकट के बीच भारत में एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी, सरकार ने आपूर्ति बनाए रखने के लिए कदम उठाये। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। संघर्ष के 12वें दिन देश के कई हिस्सों में रसोई गैस यानी एलपीजी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गयी है। संभावित कमी की आशंका के चलते कुछ जगहों पर लोगों ने पहले से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए जल्दबाजी शुरू कर दी है। 

वहीं होटल और ढाबा संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि आपूर्ति में बाधा आती है तो उनके लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो सकता है। सरकार और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और ईंधन आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं। हालांकि एलपीजी के परिवहन और आपूर्ति से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर समुद्री मार्गों पर पड़ रहा है, जिससे गैस के शिपमेंट की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। 

स्ट्रेट आफ होर्मुज से जुड़ी है सप्लाई की चिंता 

एलपीजी आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता की सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट आॅफ होर्मुज के आसपास की स्थिति है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा रास्ता तेल और गैस के वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। भारत में इस्तेमाल होने वाली एलपीजी का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए आता है। यदि यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो गैस के शिपमेंट में देरी हो सकती है। इसी संभावना ने कई जगहों पर उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। 

लखीमपुर खीरी में क्यों शुरू हुई घबराहट में खरीदारी 

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एलपीजी आपूर्ति को लेकर लोगों के बीच चिंता के कारण अचानक मांग बढ़ गई। मंगलवार को कई उपभोक्ता गैस एजेंसियों पर पहुंच गये ताकि वे जल्द से जल्द अपना सिलेंडर प्राप्त कर सकें। लखीमपुर शहर और आसपास के इलाकों में एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गयीं। लोगों का कहना था कि वे पहले से बुक किये गये सिलेंडर जल्द लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि भविष्य में संभावित कमी से बचा जा सके। 

प्रशासन ने कहा, घबराने की जरूरत नहीं 

हालांकि जिला प्रशासन ने लोगों से घबराने की अपील नहीं करने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने उपभोक्ताओं से अनावश्यक रूप से सिलेंडर जमा न करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी है। 

डिलीवरी में देरी से बढ़ी चिंता 

स्थानीय निवासी प्रशांत ने बताया कि आम तौर पर सिलेंडर बुक करने के बाद उसी दिन या अगले दिन डिलीवरी हो जाती थी। लेकिन इस बार पांच दिन बीत जाने के बाद भी सिलेंडर नहीं पहुंचा। इसी वजह से उन्हें लगा कि शायद गैस की आपूर्ति में कोई समस्या आ रही है। कई कारोबारियों का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर मिलना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि गैस एजेंसियां फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही हैं। 

कारोबारियों में बढ़ी चिंता 

होटल और रेस्टोरेंट चलाने वाले कई व्यापारियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई में दिक्कत आ रही है। इसके कारण किचन का काम प्रभावित होने लगा ह। कुछ जगहों पर कारोबारियों को सीमित गैस के साथ काम चलाना पड़ रहा है, जबकि कुछ रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में भी बदलाव करने पर मजबूर हो गये हैं। 

प्रशासन ने बताया अफवाह से पैदा हुआ दबाव 

जिला आपूर्ति अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने स्थिति को लेकर कहा कि यह स्थिति उपभोक्ताओं में फैली घबराहट की वजह से बनी है। उनके मुताबिक जिले में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और स्टॉक भी पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि जिले में कुल 83 एलपीजी वितरण केंद्रों के माध्यम से लगभग 16 हजार घरेलू गैस सिलेंडर भेजे गए हैं, जबकि सामान्य दिनों में औसतन 15 हजार सिलेंडर की मांग रहती है। प्रशासन का कहना है कि लोग अनावश्यक घबराहट में अतिरिक्त सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव दिखाई दे रहा है। 

उत्तराखंड सरकार ने बनाया वैकल्पिक ईंधन का प्लान 

गैस सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के बीच उत्तराखंड सरकार ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। सरकार ने उन व्यवसायों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने के निर्देश दिए हैं जो बड़े पैमाने पर एलपीजी पर निर्भर हैं। राज्य सरकार ने उत्तराखंड वन विकास निगम को निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर पर्याप्त मात्रा में जलाऊ लकड़ी उपलब्ध करायी जाये। यदि एलपीजी की आपूर्ति में ज्यादा परेशानी आती है तो होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस लकड़ी को वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। 

गोवा में रेस्टोरेंट कारोबार पर चिंता 

एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता केवल एक राज्य तक सीमित नहीं है। गोवा में भी रेस्टोरेंट मालिकों ने आशंका जताई है कि यदि कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो कई रेस्टोरेंट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है। गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे जल्द ही केंद्र के पेट्रोलियम मंत्रालय के सामने उठाया जायेगा। उन्होंने कहा कि यह पर्यटन उद्योग से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है और सरकार जल्द समाधान निकालने की कोशिश करेगी। गोवा में तीन हजार से अधिक पंजीकृत रेस्टोरेंट हैं और इनमें से अधिकांश अपने किचन संचालन के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। 

चेन्नई में कुछ होटल बंद करने पड़े 

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में भी गैस की कमी का असर देखने को मिला है। यहां कुछ होटल और खाने के प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से अपना काम बंद करना पड़ा। एक लोकप्रिय होटल के बाहर लगाये गये नोटिस में लिखा गया कि एलपीजी सप्लाई नहीं मिलने की वजह से 11 मार्च 2026 को होटल बंद रखा जायेगा। होटल संगठनों के अनुसार कई रेस्टोरेंट के पास मौजूद कमर्शियल गैस का स्टॉक केवल एक या दो दिन तक ही चल पायेगा। स्थिति को देखते हुए कई रेस्टोरेंट मालिकों ने अपने मेन्यू में बदलाव किया है और ऐसे व्यंजन पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें गैस की खपत कम हो। 

एलपीजी की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए सरकार के कदम 

देश में रसोई गैस यानी एलपीजी की कमी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने कुछ जरूरी कदम उठाये हैं। सरकार ने तेल रिफाइनरियों से कहा है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ायें, ताकि देश में गैस की सप्लाई बनी रहे और घरेलू जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके। सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत यह भी तय किया है कि गैस वितरण में सबसे पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जायेगी। यानी घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर को पहले उपलब्ध कराया जायेगा, जबकि व्यावसायिक उपयोग बाद में किया जायेगा। 

इसके अलावा, गैस सिलेंडर की जमाखोरी रोकने के लिए नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले उपभोक्ता एक सिलेंडर लेने के 21 दिन बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे। अब इस समय को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। इससे लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर जमा नहीं कर पायेंगे और गैस की सप्लाई सभी तक सही तरीके से पहुंच सकेगी।

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