T 20 world cup : सुपर आठ मुकाबलों से पहले भारी चिंता में टीम इंडिया

 

T20 World Cup

सुपर 8 से पहले टीम इंडिया के लिए दो बड़ी चिंताएं

एबीएन स्पोर्ट्स डेस्क। भारतीय टीम के सहायक कोच रयान टेन डोएशे ने इस बात पर सहमति जताई कि बाएं हाथ के बल्लेबाजों वाले शीर्ष क्रम के लिए  विपक्षी टीमों का सही रणनीति बनाना और फिंगर (उंगलियों के) स्पिनरों के खिलाफ बल्लेबाजों का संघर्ष टी20 विश्व कप के सुपर आठ में भारत के सामने दो अहम मुद्दे होंगे। 

डोएशे ने नीदरलैंड के खिलाफ अंतिम लीग मैच में भारत की जीत के बाद पत्रकारों से कहा कि खिताब के प्रबल दावेदार ने अभी तक एक भी मैच ऐसा नहीं खेला है जिसमें उसका पूरी तरह से दबदबा रहा हो। भारत के शीर्ष तीन बल्लेबाजों में अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और तिलक वर्मा शामिल हैं। 

यह तीनों बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और डोएशे ने स्वीकार किया कि इससे विपक्षी टीमों के लिए उनके खिलाफ रणनीति बनाना आसान हो गया है। प्रतिद्वंद्वी टीमें अभिषेक शर्मा सहित शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों पर अंकुश लगाने के लिए पावरप्ले में ऑफ स्पिनरों का इस्तेमाल कर रही हैं। अभिषेक इस टूर्नामेंट में तीन मैच में खाता भी नहीं खोल पाए हैं जबकि कुछ समय पहले तक वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में थे।

नीदरलैंड के ऑफ स्पिनर आर्यन दत्त ने बुधवार को पावरप्ले में तीन ओवर फेंके और अभिषेक और किशन को आउट किया। डोएशे का मानना है कि भारत को उंगलियों से गेंदबाजी करने वाले स्पिनरों के खिलाफ अपने खेल में बड़े सुधार की जरूरत है। घरेलू टीम को दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर आठ मैचों में उंगलियों से गेंदबाजी करने वाले स्पिनरों से निपटने का तरीका ढूंढना होगा।

उन्होंने कहा, इससे टीमों को भारत के खिलाफ रणनीति बनाने में आसानी हुई है। हमारे पास शीर्ष तीन में ज्यादा विकल्प नहीं हैं। हमारे पास संजू सैमसन बेंच पर बैठे हैं और आगामी मैचों को देखते हुए अगर हम उंगलियों के स्पिनरों को देखें तो इस मामले में हमारा सामना न्यूजीलैंड से होगा।

डोएशे ने कहा, हमारे पास कुछ ऐसे गेंदबाज हैं जो उंगलियों से स्पिन गेंदबाजी करते हैं। वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका के पास भी अगर हम मार्करम को शामिल करें, तो इस तरह के गेंदबाज हैं। लेकिन कुल मिलाकर हमें लगता है कि ये हमारे सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं और हम टीम में बाएं हाथ के अधिक बल्लेबाजों से काम चला लेंगे।

नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने दिल्ली में अपनी राउंड आर्म ऑफ स्पिन गेंदबाजी से भारतीय बल्लेबाजों को चकमा दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान के उस्मान कादिर, सलमान आगा और साइम अयूब कोलंबो में भारतीय बल्लेबाजों पर दबाव बनाने में कामयाब रहे। डोएशे ने कहा कि जब गेंद थोड़ी रुक-रुक कर आ रही हो तो बल्लेबाजों को उंगलियों के स्पिनरों के खिलाफ खेलने का तरीका ढूंढना होगा।

टी20 विश्व कप के अगले चरण में सुधार के क्षेत्रों के बारे में बात करते हुए डोएशे ने कहा, मैं ऑफ स्पिन नहीं कहूंगा, मैं फिंगर स्पिन (उंगलियों के स्पिनर) कहूंगा। अगर आप आंकड़ों की बात करें तो मुझे लगता है कि पाकिस्तान ने पिछले मैच में 14 ओवर फिंगर स्पिनरों से करवाए। मेरा अनुमान है कि शायद उन्होंने 4 विकेट लिए और 78 रन दिए। यह अच्छे आंकड़े नहीं हैं।

डोएशे ने कहा, अगले तीन मैच में भी हमें फिंगर स्पिन गेंदबाजी का सामना करना पड़ेगा और उसे देखते हुए मुझे लगता है कि हमें इस पर ध्यान देना होगा। भारत रविवार को यहां सुपर 8 के अपने पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका से भिड़ेगा। डोएशे ने कहा, मुझे लगता है कि बेहतर विकेटों पर आपको ऐसा (स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजों को संघर्ष करते हुए) देखने को नहीं मिलेगा। 

आप अधिक आत्मविश्वास के साथ गेंद को हिट कर सकते हैं, लेकिन हमें उन जगहों के लिए रणनीति बनानी होगी जहां विकेट स्थिर हों और चौके-छक्के लगाने के अवसर हों। हमें उस खतरे से निपटने के लिए रणनीत बनानी होगी। पाकिस्तान के खिलाफ भारत के संघर्ष को देखते हुए नीदरलैंड ने भी पावरप्ले में स्पिन गेंदबाजों से भारत को दबाव में डालने की योजना बनाई थी।

नीदरलैंड के बास डी लीडे ने कहा ने कहा, हमने पाकिस्तान के खिलाफ मैच देखा और पाया कि उन्हें स्पिन गेंदबाजों से परेशानी हो रही थी। इसलिए हमने पावरप्ले में स्पिन गेंदबाजों पर भरोसा किया और रन बनाने के उनके विकल्पों को सीमित करने की कोशिश की। अभिषेक शर्मा अभी तक तीन मैच में अपना खाता नहीं खोल पाए हैं लेकिन डोएशे इस सलामी बल्लेबाज की फॉर्म को लेकर चिंतित नहीं हैं। 

डोएशे ने कहा, नीदरलैंड के खिलाफ मैच से एक दिन पहले अभिषेक ने नेट प्रैक्टिस में बहुत अच्छी बल्लेबाजी की। उन्होंने 90 मिनट तक बल्लेबाजी की। मुझे लगता है कि हमें उन्हें थोड़ा आराम भी देना होगा। बीच में उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। मुझे उनकी फॉर्म को लेकर कोई चिंता नहीं है। वह आगामी मैचों में खेलने के लिए तैयार हैं।

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Published / 2026-02-19 15:44:06
*छत्रपति शिवाजी जयंती वीरता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रेरक पर्व: संजय सर्राफ* हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान योद्धा एवं आदर्श शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती प्रत्येक वर्ष 19 फरवरी को मनाई जाती है। इसी दिन सन् 1630 में उनका जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। कुछ स्थानों पर तिथि के अनुसार भी जयंती मनाई जाती है, किंतु प्रचलित रूप से 19 फरवरी को ही यह दिवस पूरे देश, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी, न्यायप्रिय तथा धर्मनिरपेक्ष शासक थे। उन्होंने उस समय विदेशी औरअत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का संकल्प लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी अद्वितीय सैन्य रणनीति, विशेषकर गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध पद्धति) के माध्यम से उन्होंने शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त किया। उनका राज्याभिषेक सन् 1674 में रायगढ़ किले में हुआ, जिसके बाद वे औपचारिक रूप से “छत्रपति” की उपाधि से अलंकृत हुए।शिवाजी जयंती केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, साहस, संगठन और सुशासन की प्रेरणा का पर्व है। उन्होंने प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोपरि रखा। महिलाओं के सम्मान और धार्मिक स्थलों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय थी। वे सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना रखते थे और उनकी सेना में विभिन्न जाति एवं समुदायों के लोग सम्मिलित थे। इससे उनके उदार और समावेशी दृष्टिकोण का परिचय मिलता है।इस दिन विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्याख्यान, पुष्पांजलि एवं देशभक्ति गीतों का आयोजन किया जाता है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन और आदर्शों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जाता है।छत्रपति शिवाजी जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी में आत्मसम्मान, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करना है। आज के समय में जब नैतिक मूल्यों और आदर्श नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है, तब शिवाजी महाराज का जीवन हमें साहस, रणनीति, न्याय और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।निस्संदेह, छत्रपति शिवाजी जयंती भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय का स्मरण है, जो हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। संजय सर्राफ

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