एबीएन सोशल डेस्क। पूरी दुनिया में बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन (डब्ल्यूजेए) ने अपने तरह की पहली वैश्विक मुहिम जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड शुरू की है जिसकी कमान भारत के प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता व अधिवक्ता भुवन ऋभु को सौंपी गयी है।
इसका एलान डोमिनिकन रिपब्लिक में हुई वर्ल्ड लॉ कांग्रेस में हुआ जिसमें 70 देशों के 1500 से भी ज्यादा विधिवेत्ताओं, जजों, बाल अधिकार अधिवक्ताओं और कानून के जानकारों ने हिस्सा लिया। जस्टिस फॉर चिल्ड्रेन वर्ल्डवाइड दुनियाभर के विधिवेत्ताओं, संस्थानों और सरकारों को एकजुट कर कानून के शासन के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व मजबूती के लिए पहली वैश्विक मुहिम है।
इसमें बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम व बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण व बाल अधिकारों को मजबूती देने के लिए भुवन ऋभु के नेतृत्व में दुनियाभर के अधिवक्ताओं, विधिवेत्ताओं और संस्थानों का एक मजबूत वैश्विक नेटवर्क तैयार किया जायेगा।
इस मौके पर भुवन ऋभु ने कहा, हर बच्चे के लिए न्याय व सुरक्षा पहली वैश्विक प्राथमिकता होनी चाहिए। सीमाहीन अपराधों से निपटने के लिए सीमाहीन कार्रवाइयों और प्रतिक्रिया की जरूरत है। बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून के शासन को मजबूती न सिर्फ उनका मूलभूत अधिकार है बल्कि यह स्वतंत्रता, समता और सभ्यता के भविष्य के लिए भी अनिवार्य शर्त है।
इस मंच का एक मुख्य उद्देश्य होगा- विभिन्न क्षेत्रों में नि:शुल्क कानूनी मदद मुहैया कराने वाले वरिष्ठ वकीलों की सूची तैयार और ब्योरे रखना। यह मंच नई पीढ़ी के वकीलों को बाल अधिकार कानूनों का प्रशिक्षण देगा, अंतरराष्ट्रीय सहयोग व रणनीतिक कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए कानूनी सुधारों को बढ़ावा देगा और बच्चों से जुड़े मामलों में न्यायिक तंत्र तक पहुंच को बेहतर बनायेगा।
इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए डब्ल्यूजेए के अध्यक्ष जेवियर क्रेमाडेस ने कहा, भुवन ऋभु के हाथ में कमान से कानून के शासन के बाबत विभिन्न वैश्विक नजरियों के बारे में हमारी समझ और गहरी होगी। यह हर बच्चे की न्याय तक पहुंच और सीमाओं के आर-पार सहयोग व साझेदारी की संस्कृति विकसित करने का समय है।
भुवन ऋभु जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के संस्थापक और प्रमुख सूत्रधार हैं जो बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारत का सबसे बड़ा कानूनी हस्तक्षेप नेटवर्क है। पिछले दो वर्षों में ही जेआरसी ने सीधे हस्तक्षेपों के जरिए तीन लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं, ट्रैफिकिंग गिरोहों के चंगुल से 85,000 बच्चों को मुक्त कराया है और 54,000 से ज्यादा बाल दुर्व्यापारियों और बाल शोषकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में सहायता की है।
भुवन ऋभु ने पिछले दो दशकों में 60 से भी ज्यादा जनहित याचिकाएं दायर की है जिस पर सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों ने बाल अधिकारों को मजबूती देने वाले ऐतिहासिक फैसले सुनाये हैं। वर्ष 2011 में उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिकिंग को संयुक्त राष्ट्र के प्रोटोकाल के अनुरूप परिभाषित किया। साथ ही, 2013 में उनके कानूनी अभियान ने देश में गुमशुदा बच्चों के मुद्दे को उजागर किया और आखिरकार इस पर ऐतिहासिक फैसला आया।
भुवन ऋभु बहुत से कानूनी और नीतिगत सुधारों के प्रमुख सूत्रधार रहे हैं। उन्होंने बच्चों के आॅनलाइन और असल जीवन में यौन शोषण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चाइल्ड पोर्नोग्राफी सामग्रियां रखना, देखना व डाउनलोड करना अपराध है। साथ ही शीर्ष अदालत ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी की जगह बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री (सी-सीम) शब्द के उपयोग का निर्देश दिया ताकि बच्चों के खिलाफ अपराध की वास्तविक प्रकृति को उजागर किया जा सके।
उन्होंने विभिन्न कानूनी हस्तक्षेपों के जरिये यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं कि अपराधी कानून के शिकंजे से बचने न पाएं और पीड़ित बच्चों को तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर न्याय मिले। वर्ल्ड ज्यूरिस्ट एसोसिएशन उन गिने-चुने अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल है जो शांति, न्याय और लोकतंत्र के आधार के तौर पर कानून के शासन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए पिछले 60 वर्षों से सतत प्रयास कर रहा है।
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