एबीएन हेल्थ डेस्क। राग, रंग, उल्लास और हुड़दंड का त्योहार होली 21 मार्च को है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी इस रंगीन त्योहार को पसंद करते हैं और एक-दूसरे के साथ रंग-गुलाल खेल कर और खा-पीकर इसे मनाते हैं।
पहले के समय में होली पारंपरिक तरीके से मनायी जाती थी, जिसमें प्राकृतिक और ऑर्गेनिक रंगों का प्रयोग होता था, लेकिन आजकल मिलावटी व सिंथेटिक रंगों का प्रचलन काफी अधिक बढ़ गया है। ऐसे रंग हमारी त्वचा, आंखों, नाखून, बाल एवं आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।
इन रासायनिक रंगों से त्वचा पर खुजली, दाने, एलर्जी, एग्जिमा, ब्रेकआउट आदि होने लगता है। लेकिन कुछ सावधानियां बरत कर हम होली का त्योहार मस्ती और हर्षोल्लास के साथ मना सकते हैं।
किसी भी तरह की तकलीफ होने पर स्वयं इलाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में चर्म रोग विशेषज्ञ से अवश्य मिलें।
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