टीम एबीएन, लोहरदगा। लोहरदगा प्रखंड के हेंदलासो उपर टोली गांव में नवनिर्मित श्री श्री 1008 हनुमान मंदिर का पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान महायज्ञ पूणार्हुति और भंडारे के साथ बुधवार देर रात संपन्न हो गया। पूजा और भंडारे में आसपास के एक दर्जन से अधिक गांव के श्रीराम और हनुमान के भक्त श्रद्धालु शामिल हुए।
भजन और कीर्तन संध्या का भी आयोजन चलता रहा। खास बात यह कि नवनिर्मित हनुमान मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर गांव के लोगों ने एक सप्ताह से लहसुन- प्याज भी खाना छोड़ दिया था। उनका सात्विक भाव से लोग अनुष्ठान में हर दिन शामिल होते रहा। सबके सहयोग और सामूहिक पहल से कार्यक्रम अतिसफल रहा।
मुख्य अनुष्ठान करता आचार्य रमेश देव पौराणिक के आचार्य तो में संपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने में रमेश देव पौराणिक, अनूप देव पौराणिक, रांची के उमेश नाथ मिश्र, गुमला के पवन नाथ मिश्रा और दिनेश देव पौराणिक आदि ने सहयोग किया।
प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान को संपन्न कराने वाले आचार्य रमेश देव पौराणिक ने इस अवसर पर कहा कि श्रीराम भक्त हनुमान अजर-अमर हैं।वह हर युग में रहते हैं। हनुमानजी की भक्ति करने से सभी संकट चमत्कारिक रूप से समाप्त हो जाता है। भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है।
मंगलवार और शनिवार का दिन विशेषरूप से हनुमानजी की उपासना करने के लिए श्रेष्ठ माना गया है। यह थोड़ी सी पूजा से जल्दी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करते हैं। मंगल ,शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति कि लिए भी हनुमान जी की आराधना अत्यंत लाभकारी होती है।
घर में फैली नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां भी हनुमानजी की आराधना करने से भाग जाती हैं। प्रभु श्रीराम के प्रति बाल ब्रह्मचारी हनुमान की निस्वार्थ भक्ति और अनन्य प्रेम की गाथा हमारे पौराणिक कथा में उल्लेख है। हनुमानजी ने भगवान राम के दिल में ऐसी जगह बनाई कि दुनिया उन्हें प्रभु राम का सबसे बड़ा भक्त मानती है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के बाद दरबार में उपस्थित सभी लोगों को उपहार दिए जा रहे थे। इसी दौरान माता सीता ने रत्न जड़ित एक बेश कीमती माला अपने प्रिय हनुमान को दी। प्रसन्न चित्त से उस माला को लेकर हनुमान जी थोड़ी दूरी पर गए और उसे अपने दांतों से तोड़ते हुए बड़ी गौर से माला के मोती को देखने लगे।
उसके बाद उदास होकर एक-एक कर उन्होंने सारे मोती तोड़-तोड़ कर फेंक दिये। यह सब दरबार में उपस्थित लोगों ने देखा तो सब के सब आश्चर्य में पड़ गए। जब हनुमान जी मोती तो तोड़ कर फेंक रहे थे तब लक्ष्मणजी को उनके इस कार्य पर बहुत क्रोध आया,इस बात को उन्होंने श्री राम का अपमान समझा।
उन्होंने प्रभु राम से कहा कि हे भगवन, हनुमान को माता सीता ने बेशकीमती रत्नों और माणिक्य की माला दी। उन्होंने उस माला को तोड़कर फेंक दिया। जिसके बाद भगवान राम बोले, हे अनुज तुम मुझे मेरे जीवन से भी अधिक प्रिय हो, जिस कारण से हनुमान ने उन रत्नों को तोड़ा है। यह उन्हें ही मालूम है। इसलिए इस जिज्ञासा का उत्तर हनुमान से ही मिलेगा।
तब राम भक्त हनुमान ने कहा- मेरे लिए हर वो वस्तु व्यर्थ है। जिसमें मेरे प्रभु राम का नाम न हो। मैंने यह हार अमूल्य समझ कर लिया था। जब मैनें इसे देखा तो पाया कि इसमें कहीं भी राम-नाम नहीं है। मेरी समझ से कोई भी वस्तु श्रीराम के नाम के बिना अमूल्य हो ही नहीं सकती। अत: मेरे हिसाब से उसे त्याग देना चाहिए।
यह बात सुनकर भ्राता लक्ष्मण बोले कि आपके शरीर पर भी तो राम का नाम नहीं है, तो इस शरीर को क्यों रखा है? हनुमान तुम इस शरीर को भी त्याग दो। लक्ष्मण की बात सुनकर हनुमान ने अपना वक्षस्थल नाखूनों से चीर दिया और उसे लक्ष्मणजी सहित सभी को दिखाया, जिसमें श्रीराम और माता सीता की सुंदर छवि दिखाई दे रही थी। यह घटना देख कर लक्ष्मण जी से आश्चर्यचकित रह गए।
अपनी गलती के लिए उन्होंने हनुमानजी से क्षमा मांगी। कार्यक्रम को सफल बनाने में लाल राजेश्वर नाथ शाहदेव, लाल मनोज नाथ शाहदेव, लाल बलराम नाथ शाहदेव, लाल जितेन्द्र नाथ शाहदेव, सचित वर्मा, मनीष वर्मा, पवन ठाकुर, रवि शाहदेव, रवि वर्मा, विकास ठाकुर, नीरज चौधरी, रितिक वर्मा, नितिन वर्मा, राजिन्द्र वर्मा, प्रभाकर शाहदेव, दिवाकर शाहदेव, रिंकू ठाकुर, विवेक वर्मा, सूरज शाहदेव, पियूष वर्मा, योगेश वर्मा, शिव चौधरी, संतोष ठाकुर, मनीष ठाकुर, अजय ठाकुर, शुभम ठाकुर, दीपक शाहदेव, नवल वर्मा, अनु देवी, सुशीला देवी, सरिता देवी, टिंकू चौधरी, कमलेश ठाकुर, लव शाहदेव, लाल नवल किशोर नाथ शाहदेव, पुष्पा देवी, सरस्वती देवी, संध्या देवी, निरुपा देवी योगदान किया शहर से दिनेश पांडेय, डबला मुखर्जी, सीपी यादव, प्रभाकर पाठक, ओमप्रकाश सिंह समेत बड़ी संख्या में भक्तजन शामिल हुए।
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