टीम एबीएन, रांची। झारखंड शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक किरण कुमारी पासी द्वारा कक्षा 1 से कक्षा 7 तक के वार्षिक परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन से लेकर परीक्षाफल निर्माण और वितरण का कार्य ग्रीष्मावकाश के दौरान करने संबंधी आदेश जारी किया गया है।
इस आदेश का झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ के साथ-साथ पूरे राज्य भर के शिक्षकों ने विरोध किया है। इसमें शीघ्र संशोधन करने की मांग के साथ-साथ राज्य के सभी विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश के अवधि में एकरूपता लाने की अपील की गयी है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू ने बताया कि ग्रीष्मावकाश पहले से निर्धारित रहता है और यही समय होता है जब शिक्षक चिकित्सा, विवाह समारोह, भ्रमण आदि जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक और सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करता है।
हजारों शिक्षक अंतर जिला स्थानांतरण नहीं होने से अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पदस्थापित हैं। ग्रीष्मावकाश के समय ही उन्हें अपने परिवार के साथ क्वालिटी समय व्यतीत करने का अवसर मिलता है। ऐसे में अगर अवकाश के समय मूल्यांकन और परीक्षाफल का कार्य किया जाये तो अवकाश का औचित्य ही नहीं रहेगा।
संघ के महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने कहा कि अन्य राज्य कर्मियों की तुलना में मात्र 14 दिवस का अर्जित अवकाश शिक्षकों को देय होता है और इसमें होने वाली क्षति को ग्रीष्मावकाश के माध्यम से पुरा किया जाता है। यदि हर बार अवकाश के दौरान इस तरह के कार्य दिया जाना है तो फिर ग्रीष्मावकाश को रद्द करते हुए अन्य राज्य कर्मियों के समान अर्जित अवकाश प्रदान किया जाय।
संघ की ओर से पत्र लिखकर आदेश में संशोधन करने का आग्रह किया गया है। यदि ऐसा नहीं होता है तो शिक्षक नहीं चाहते हुए भी अवकाश के समय मूल्यांकन कार्य से दूर रहते हुए इसका वहिष्कार करने हेतु बाध्य होंगे। उक्त जानकारी झारखंड प्रगतिशील शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव बलजीत कुमार सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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