एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनियाभर में जानलेवा कोरोना वायरस के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि भारत में अभी कोरोना के मामलों में उछाल नहीं देखा गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि चीन में तेजी से बढ़ रहा जानलेवा कोरोना वायरस का सबवेरिएंट एक्सबीबी.1.5 अब पूरे भारत में फैल रहा है। इसको लेकर सरकारी पैनल अब सतर्क हो गया है। पैनल में कोरोना को जड़ से खत्म करने के लिए दूसरी बूस्टर डोज देने पर चर्चा की जा रही है।
सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त उठाया है, जब वह बूस्टर डोज की कवरेज को बढ़ाने पर जोर दे रही है। वर्तमान में 28 फीसदी आबादी ने ही बूस्टर डोज ली है। देश में पिछले साल जनवरी में बूस्टर डोज लगनी शुरू हुई थी। टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह या एनटीएजीआई की समितियों में शामिल एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स से कहा कि तकनीकी समूह के सदस्यों के बीच दूसरी बूस्टर डोज देने को लेकर चर्चा शुरू हो गयी है। हालांकि कोई भी सिफारिश करने से पहले हम सभी वैज्ञानिक डेटा का अध्ययन करेंगे।
वैक्सीन के बाद छह महीनों में कम हो जाती है इम्युनिटी : अध्ययनों के मुताबिक, कोरोना वैक्सीन के बाद इम्युनिटी आमतौर पर चार से छह महीनों में कम हो जाती है, लेकिन चौथी खुराक (दूसरी बूस्टर डोज) इस गंभीर बीमारी को दूर करने में मदद कर सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने 26 दिसंबर को एक बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया से अतिरिक्त खुराक की अनुमति देने के लिए कहा था। डॉक्टरों ने बैठक में अनुरोध किया कि कम से कम उच्च जोखिम वाले लोगों जैसे कि स्वास्थ्य देखभाल कर्मचारियों, बुजुर्गों और कॉमरेडिटी से पीड़ित लोगों को चौथी खुराक दे दी जाये।
सरकार जनता से कर रही बूस्टर डोज लेने की अपील : स्वास्थ्य कर्मचारियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स को तीसरी खुराक करीब एक साल पहले दी गयी थी। सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार का ध्यान तीसरी खुराक के कवरेज को बढ़ाने पर है, जो पात्र आबादी का 27-28% है। लोगों को तीसरी खुराक लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने कई कदम भी उठाये। पिछले साल जुलाई में स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अभियान शुरू किया, जिसके तहत देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर तीसरी बूस्टर खुराक 75 दिनों के लिए सरकारी क्लीनिकों में मुफ्त दी गई। बता दें कि इंडियन सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (इन्साकॉग) ने अपने बुलेटिन में कहा है कि कोरोनो वायरस का ओमीक्रॉन स्वरूप और इससे बने अन्य स्वरूप भारत में प्रमुखता से बने हुए हैं, जिसमें एक्सबीबी प्रमुख है। बुलेटिन के मुताबिक बीए.2.75 और बीए.2.10 स्वरूप भी फैल रहे थे लेकिन कुछ हद तक। बुलेटिन के मुताबिक, विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत में बीए.2.75 वायरस का प्रचलित स्वरूप रहा है। हालांकि, इस अवधि में गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने के मामलों में कोई वृद्धि नहीं देखी गयी है।
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