टीम एबीएन, रांची। झारखंड में 145 प्रखंड में भीषण सुखाड़ के हालात बने हुए हैं, जबकि 98 ऐसे प्रखंड हैं। जहां आंशिक सुखाड़ जैसे हालात देखने को मिल रहे हैं। झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में ये हकीकत सामने आई. हालांकि राज्य की हेमंत सोरेन सरकार सुखाड़ को लेकर अक्टूबर माह के अंत में केंद्र सरकार को अपना रिपोर्ट और सुखाड़ को लेकर मुआवजा राशि का दावा करेगी। कृषि निदेशक निशा उरांव ने जानकारी देते हुए कहा कि अगर यही हालात अंतिम समय तक रहता है, तो केंद्र सरकार के समक्ष राज्य सरकार आर्थिक मुआवजा को लेकर कुछ इस तरह दावा करेगी। 31 अक्टूबर तक खरीफ के लिये केंद्र सरकार को रिपोर्ट देने का अंतिम समय भारत सरकार से सुखाड़ के एवज में राज्य को मिलने वाली राशि 6 हजार 800 रुपये प्रति हेक्टेयर 33 प्रतिशत से ज्यादा फसल नुकसान 13 हजार 500 रुपये प्रति हेक्टेयर जहां पूरी तरह से फसल नुकसान हुआ है 60 रुपये प्रति किसान प्रतिदिन यानी एक किसान को 5400 रुपया, वहीं 45 रुपये प्रति बच्चा- प्रति दिन बच्चों को देने का प्रावधान, 90 दिनों तक देने का है प्रावधान। राज्य की हेमंत सोरेन सरकार ने सुखाड़ से निबटने के लिये कई तरह के कदम उठाने का निर्णय लिया है। इसके तहत पलायन को रोकने के लिये हर गांव तक रोजगरण सृजन का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए मनरेगा के तहत 5 योजना को हर गांव में शुरू करने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि सुखाड़ को लेकर सरकार गंभीर है। सरकार की कोशिश है कि इस हालत में क्या बेहतर हो सकता है। हेमंत सोरेन ने कहा कि ग्रामीणों को राहत देने, रोजगार देने, आय में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की कोशिश है कि राज्य से लोगों के पलायन को कैसे रोका जाये। यही वजह है कि उन्होंने बड़ी संख्या योजना को धरातल पर उतारने का निर्देश दिया है। अब सर्वजन पेंशन को माह की शुरुआत में ही देने का निर्देश दिया गया है। सरकार ताजा हालात पर अभी समीक्षा करती रहेगी।
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