गोगा नवमी पांच सितंबर को

 

गोगा नवमी लोक आस्था और प्रकृति संरक्षण का देता है संदेश : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री सह प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि गोगा नवमी उत्तर भारत विशेषकर राजस्थान मे श्रद्धा और लोक विश्वास के साथ मनाया जाने वाला महत्वपूर्ण पर्व है। इस वर्ष गोगा नवमी 5 सितंबर दिन शनिवार को मनायी जायेगी। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है और जन्माष्टमी के अगले दिन पड़ता है।

गोगा नवमी जाहरवीर गोगाजी महाराज को समर्पित है। लोक मान्यता में उन्हें गोगाजी, गुग्गा वीर, जाहरवीर, जाहर पीर, गोगा पीर और राजा मंडलिक आदि नामों से जाना जाता है। उन्हें वीर योद्धा, लोकदेवता और सर्पों से रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। गोगाजी की लोक आस्था केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। अनेक स्थानों पर विभिन्न समुदायों के लोग उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। 

लोककथा के अनुसार राजस्थान के ददरेवा क्षेत्र की रानी बाछल देवी संतान प्राप्ति की इच्छा रखती थीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गुरु गोरखनाथ ने उन्हें आशीर्वाद दिया और प्रसाद स्वरूप एक फल प्रदान किया। इसी आशीर्वाद से गोगाजी का जन्म हुआ। बचपन से ही वे पराक्रमी, धर्मनिष्ठ और असाधारण वीरता वाले माने गये। आगे चलकर उन्होंने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया और जनकल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। 

लोक विश्वास में उनकी वीरता और सिद्ध शक्ति के कारण उन्हें सर्पों का रक्षक भी माना गया। गोगा नवमी पर श्रद्धालु गोगाजी के स्थान अथवा प्रतीक की पूजा करते हैं। कई क्षेत्रों में अखंड ज्योति, धूप-दीप, हवन, भजन-कीर्तन और गोगाजी की कथा का आयोजन होता है। खीर, पुए तथा अन्य पारंपरिक प्रसाद अर्पित किए जाते हैं, राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले का गोगामेड़ी गोगाजी की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां इस अवसर पर विशाल मेला और धार्मिक आयोजन प्रसिद्ध हैं। 

गोगा नवमी का मूल संदेश श्रद्धा, वीरता, लोककल्याण, प्रकृति के प्रति सम्मान और जीव-जंतुओं के संरक्षण से जुड़ा है। सर्पों के प्रति भय के स्थान पर उनके प्रति सह-अस्तित्व और करुणा का भाव विकसित करना भी इस लोकपर्व की महत्वपूर्ण भावना है। यह पर्व हमें अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और वीर पुरुषों की स्मृतियों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है। 

गोगा नवमी केवल पूजा-अर्चना का अवसर नहीं, बल्कि लोक आस्था, सामाजिक समरसता और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन का संदेश देने वाला पर्व है। श्रद्धालु इस दिन जाहरवीर गोगाजी का स्मरण कर परिवार की सुख-शांति, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं।

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