पलामू : करोड़ों खर्च, फिर भी बैरंग लौट रहे जनप्रतिनिधि

 

पड़वा प्रखंड कार्यालय के शौचालय में पसरी गंदगी, बदबू के कारण मीटिंग छोड़ भागी महिला मुखिया 

एबीएन न्यूज नेटवर्क, मेदिनीनगर। सरकार जनता को बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर हर साल लाखों-करोड़ो रुपए पानी की तरह बहा रही है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। मामूली रखरखाव के अभाव में सरकारी संपत्तियां सफेद हाथी साबित हो रही हैं। ताजा मामला पलामू के पड़वा प्रखण्ड कार्यालय का है, जहां स्वच्छता अभियानों की धज्जियां उड़ती साफ देखी जा सकती हैं। 

स्वच्छता का नारा तामझाम के साथ दिया जाता हैं ,लेकिन  प्रखंड कार्यालय के सभागार के बगल में बना बाथरूम देख-रेख के अभाव में इस कदर बदहाल है कि वह उपयोग के लायक ही नहीं बचा।जो स्वच्छता अभियान पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा हैं ।बताया गया कि बुधवार को प्रखण्ड कार्यालय के सभागार में जल सहिया और मुखियाओं की बैठक चल रही थी। 

इसी बीच एक महिला मुखिया शौचालय का उपयोग करने पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने दरवाजा खोला, अंदर की गंदगी और असहनीय बदबू देख वे उल्टे पांव (बैरंग) वापस लौट आईं। मुखिया ने जब बैठक में आकर शौचालय की नारकीय स्थिति बताई, तो अन्य जनप्रतिनिधि भी वहां पहुंचे। नजारा देख हर कोई दंग रह गया।

मुखिया का  कहना था कि स्वच्छता की बातें सिर्फ कागजों पर मुखिया ने रोष जताते हुए कहा कि एक तरफ पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम हेमंत सोरेन स्वच्छता को लेकर बड़ी-बड़ी योजनाएं चला रहे हैं, बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन जब प्रखण्ड मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय का यह हाल है, तो गांवों की स्थिति क्या होगी? महिला जनप्रतिनिधियों के लिए यहां न्यूनतम सुविधा तक नहीं है। 

लोगों ने सिस्टम पर सवाल किया पूछा  आखिर पैसा जा कहां रहा है? हैरानी की बात यह है कि जिस कार्यालय से पूरे प्रखंड की स्वच्छता और विकास की मॉनिटरिंग होती है, वहीं का सिस्टम फेल है। शौचालय की बदहाली यह बताने के लिए काफी है कि सरकारी पैसे का सदुपयोग करने में अधिकारी कितने गंभीर हैं। जब सभागार के बगल वाले बाथरूम में गंदगी का अंबार, दरवाजे और पाइपलाइन जर्जर हो तो इसे क्या कहा जाये? 

लापरवाही का आलम यह है कि  नियमित सफाई के लिए किसी कर्मचारी की तैनाती नही हैं, ऐसे में बैठक में आने वाली महिला सहिया और मुखियाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं लोगों का कहना हैं कि स्वच्छता केवल नारों से नहीं, नीयत से आयेगी। अगर प्रखण्ड स्तर पर ही शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं, तो आम जनता से स्वच्छ भारत की उम्मीद करना बेमानी है। 

क्या कहती है महिला मुखिया  

कजरी पंचायत की मुखिया सह मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष रंजना कुमारी सिंह व लोहड़ा पंचायत की मुखिया सुमित्रा देवी ने कहा कि प्रखंड कार्यालय में स्थित शौचालय में गंदगी के कारण काफी परेशानी हो रही है। मुखिया ने बताया कि पिछले बैठक में एक मुखिया व एक पंचायत समिति सदस्य मजबूरीवश शौचालय में चली गयी थी, दोनों बीमार हो गयी है।

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