देवपूजन व यज्ञीय विधान से पुंसवन (गर्भ पूजन) संस्कार पद्धति अभिभावकों ने कराये

 

गर्भस्थ शिशु परिवार,समाज व राष्ट्र का सौभाग्य व गौरव का कारण बने : गायत्री-परिवार 

एबीएन सोशल डेस्क। गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा में आज दो पुंसवन संस्कार दो परिवार द्वारा कराये गए। इस दौरान वर्तमान समय में पुंसवन संस्कार की आवश्यकता, गरिमा, महत्व व अपेक्षा पर प्रकाश डाला गया। यज्ञीय पुरोहित ने समय की अपेक्षा पर चर्चा करते हुए बताया कि गर्भस्थ शिशु परिवार, समाज, राष्ट्र का सौभाग्य, यश व गौरव का कारण बने। 

माता पिता अभिभावकों का ध्यान आकर्षित कर बताया गया कि गर्भस्थ शिशु में शारीरिक, बौद्धिक, तथा भावनात्मक नव-निर्माण व विकास के लिए अनुकूल वातावरण, खान-पान, आचार-विचार का, शुचिता पवित्रता का निर्धारण आवश्यक व आकर्षक होना चाहिए। पूर्व के कुसंस्कारों का निवारण तथा सुसंस्कारों की मंगलमय स्थापना, ग्रहण और विकास के लिए सत्संकल्प, सत्प्रयोजन, सत्पुरुषार्थ एवं देव अनुग्रह के संयोग का प्रयास रूचिकर व तीव्रतर होना चाहिए। 

गायत्री यज्ञ अनुष्ठान दौरान इस प्रकार दिशा-निर्देश व संकल्प साथ अच्छी तरह बताकर षटकर्म, देवपूजन, सर्व देव नमस्कार, स्वस्तिवाचन पाठ, रक्षा विधान कराकर शेष संस्कार विधिवत सोल्लास, एक बुराई परित्याग एवं एक अच्छाई ग्रहण कराकर संस्कार विधान संपन्न कराये गये। उक्त जानकारी गायत्री-परिवार रांची शक्तिपीठ के प्रमोद कुमार और जय नारायण प्रसाद ने दी।

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