फाल्गुन रंग पंचमी उत्सव 8 को, रंग, आनंद और भक्ति का पावन पर्व

 

  • फाल्गुन रंग पंचमी उत्सव 8 मार्च को, रंग, आनंद और भक्ति का पावन पर्व
  • रंग पंचमी भारतीय संस्कृति की रंगीन परंपराओं और आध्यात्मिक भावनाओं का है सुंदर प्रतीक: संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं विश्व हिंदू परिषद झारखंड सेवा विभाग के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में फाल्गुन मास का विशेष महत्व माना जाता है। 

इसी पावन मास में होली के उत्सवों की श्रृंखला के अंतर्गत रंग पंचमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी का पर्व 8 मार्च दिन रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व होली के पाँचवें दिन आता है और इसे विशेष रूप से रंगों के उत्सव के रूप में जाना जाता है।रंग पंचमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। 

मान्यता है कि होलिका दहन और धूलंडी के बाद इस दिन वातावरण पूरी तरह से शुद्ध और पवित्र हो जाता है। इसलिए रंग पंचमी के दिन रंग-गुलाल के माध्यम से आनंद और उल्लास का उत्सव मनाया जाता है। कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन देवी-देवता भी पृथ्वी पर आकर रंगोत्सव में सम्मिलित होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

भारत के कई क्षेत्रों विशेषकर मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और ब्रज क्षेत्र में रंग पंचमी का विशेष उत्साह देखने को मिलता है। मंदिरों में भगवान के साथ रंग-गुलाल की होली खेली जाती है, भजन-कीर्तन होते हैं और भक्तजन आपस में रंग लगाकर प्रेम और सौहार्द का संदेश देते हैं। कई स्थानों पर शोभायात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं।

रंग पंचमी का संबंध आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पर्व समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव को बढ़ावा देता है। रंगों के माध्यम से लोग अपने मन के सभी भेदभाव और कटुता को समाप्त कर एक-दूसरे को गले लगाते हैं। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर शुभकामनाएं देते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस पर्व की एक विशेषता यह भी है कि यह केवल रंग खेलने का उत्सव नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और उल्लास का प्रतीक है। रंग जीवन में उत्साह, उमंग और नई ऊर्जा का संदेश देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार रंग पंचमी के दिन गुलाल उड़ाने से वातावरण में सकारात्मकता फैलती है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।

इसके अलावा रंग पंचमी का उद्देश्य समाज में प्रेम, सद्भाव और एकता की भावना को मजबूत करना भी है। आधुनिक समय में जब जीवन की व्यस्तता और तनाव बढ़ रहे हैं, ऐसे में यह पर्व लोगों को आपसी मेल-मिलाप और खुशियों को साझा करने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार फाल्गुन मास में मनाया जाने वाला रंग पंचमी उत्सव भारतीय संस्कृति की रंगीन परंपराओं और आध्यात्मिक भावनाओं का सुंदर प्रतीक है। 

यह पर्व हमें प्रेम, आनंद और भाईचारे के रंगों से जीवन को सजाने की प्रेरणा देता है। रंग पंचमी के अवसर पर सभी लोग मिलकर समाज में सद्भाव, खुशी और सकारात्मकता का संदेश फैलाते हैं, जिससे यह पर्व केवल उत्सव ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक बन जाता है।

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