डीएवी में दो दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आरंभ

 

एबीएन कैरियर डेस्क। डीएवी झारखंड जोन बी और जे के शिक्षकों के लिए आज दो  दिवसीय शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। डीएवी कपिल देव, डीएवी गांधीनगर और डीएवी पुनदाग में आयोजित की जा रही इस कार्यशाला में अलग-अलग विषयों के प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को विषय के विविध पक्षों से अवगत कराया। 

यह कार्यशाला डीएवी सी.ए.ई के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। इस दो दिवसीय शिक्षण कार्यशाला में रांची के अलावे खूंटी, चतरा और डाल्टेनगंज के डी ए वी के शिक्षक भाग ले रहे हैं। इसमें एक हजार से अधिक सभी विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों के साथ शिक्षकों की सहभागिता है। 

यह कार्यशाला 14 फरवरी 2026 से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसमें प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं। आज कार्यशाला का शुभारंभ अलग-अलग विद्यालयों में वैदिक मंत्रोच्चार एवं गायत्री मंत्र के साथ हुआ। 

डीएवी कपिल देव में डीएवी सीएमसी के पदाधिकारी एम.सी शर्मा और जोन बी के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एम.के सिन्हा ने कार्यशाला का संयुक्त रूप में उद्घाटन किया जबकि डीएवी गांधी नगर में कार्यशाला का उद्घाटन प्राचार्य प्रदीप कुमार झा तथा डीएवी नीरजा सहाय की प्राचार्या किरण यादव ने किया। 

वहीं डीएवी पुनदाग में उद्घाटन झारखंड जोन जे के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी एसके मिश्रा, डीएवी टंडवा के प्राचार्य श्री यू.के.राय तथा प्राचार्य डॉ तापस घोष ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को कक्षा तक पहुंचाने की बात कही। वक्ताओं ने प्रशिक्षण ले रहे शिक्षकों से सी.बी.एस.ई द्वारा हाल में लायी गयी नयी मूल्यांकन पद्धति शीघ्र सीखने की पर बल दिया। कार्यशाला का समापन कल होगा। 

डीएवी कपिल देव में गणित, कंप्यूटर, ईईडीपी,संगीत, शारीरिक अध्ययन और कला विषयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण नदिया जा रहा है वहीं डीएवी गांधी नगर में हिंदी, संस्कृत , अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान, कामर्स के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विज्ञान समेत अन्य विषय के शिक्षक डीएवी पुनदाग में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

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Published / 2026-02-19 15:44:06
*छत्रपति शिवाजी जयंती वीरता, स्वाभिमान और सुशासन का प्रेरक पर्व: संजय सर्राफ* हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि भारत के महान योद्धा एवं आदर्श शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती प्रत्येक वर्ष 19 फरवरी को मनाई जाती है। इसी दिन सन् 1630 में उनका जन्म महाराष्ट्र के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। कुछ स्थानों पर तिथि के अनुसार भी जयंती मनाई जाती है, किंतु प्रचलित रूप से 19 फरवरी को ही यह दिवस पूरे देश, विशेषकर महाराष्ट्र में, बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।छत्रपति शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक दूरदर्शी, न्यायप्रिय तथा धर्मनिरपेक्ष शासक थे। उन्होंने उस समय विदेशी औरअत्याचारी शासन के विरुद्ध संघर्ष करते हुए हिंदवी स्वराज्य की स्थापना का संकल्प लिया। सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी अद्वितीय सैन्य रणनीति, विशेषकर गनिमी कावा (गुरिल्ला युद्ध पद्धति) के माध्यम से उन्होंने शक्तिशाली शत्रुओं को परास्त किया। उनका राज्याभिषेक सन् 1674 में रायगढ़ किले में हुआ, जिसके बाद वे औपचारिक रूप से “छत्रपति” की उपाधि से अलंकृत हुए।शिवाजी जयंती केवल एक ऐतिहासिक स्मरण नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, साहस, संगठन और सुशासन की प्रेरणा का पर्व है। उन्होंने प्रशासन में अनुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोपरि रखा। महिलाओं के सम्मान और धार्मिक स्थलों की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय थी। वे सभी धर्मों के प्रति सम्मान की भावना रखते थे और उनकी सेना में विभिन्न जाति एवं समुदायों के लोग सम्मिलित थे। इससे उनके उदार और समावेशी दृष्टिकोण का परिचय मिलता है।इस दिन विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्याख्यान, पुष्पांजलि एवं देशभक्ति गीतों का आयोजन किया जाता है। विद्यालयों और सामाजिक संस्थाओं में उनके जीवन और आदर्शों पर आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को प्रेरित किया जाता है।छत्रपति शिवाजी जयंती का उद्देश्य नई पीढ़ी में आत्मसम्मान, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की भावना जागृत करना है। आज के समय में जब नैतिक मूल्यों और आदर्श नेतृत्व की आवश्यकता महसूस की जा रही है, तब शिवाजी महाराज का जीवन हमें साहस, रणनीति, न्याय और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।निस्संदेह, छत्रपति शिवाजी जयंती भारतीय इतिहास के उस स्वर्णिम अध्याय का स्मरण है, जो हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करने और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करता है। संजय सर्राफ

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