एबीएन बिजनेस डेस्क। 29 जनवरी को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसी) पर चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का लाइफटाइम हाई बनाया था लेकिन महज 4 दिन से भी कम समय में कीमतें बुरी तरह धराशायी हो गयींं। सोमवार तक चांदी अपने शिखर से करीब 46 फीसदी टूट चुकी है, जो बीते 50 साल की सबसे तेज गिरावट मानी जा रही है।
इस गिरावट ने साल 1980 के ऐतिहासिक क्रैश को भी पीछे छोड़ दिया है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी को अपने पीक से 70% गिरने में करीब 5 महीने लगे थे। मौजूदा हालात में चांदी कुछ ही दिनों में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज कर चुकी है, जो उस दौर में भी नहीं देखी गयी थी।
अगर रुपए के हिसाब से देखें तो चांदी ने 70-80 घंटों में करीब 1.94 लाख रुपये की गिरावट दर्ज की है। 4.20 लाख के उच्च स्तर से फिसलकर यह 2.25 लाख रुपये तक आ गयी यानी औसतन हर घंटे करीब 2,400 रुपये की गिरावट दर्ज हुई, जिसने निवेशकों को चौंका दिया है।
सोमवार को एमसी पर चांदी 32,342 रुपये टूटकर 2,35,339 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी। सुबह चांदी 2,67,501 रुपये पर खुली थी, जबकि रविवार की स्पेशल ट्रेडिंग में यह 2,65,652 रुपये पर बंद हुई थी।
जानकारों के मुताबिक, अगर आने वाले सत्र में 25,000 रुपये तक की और गिरावट आती है, तो चांदी 2 लाख रुपये से नीचे फिसल सकती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेडिंग के दौरान 50% तक की गिरावट भी देखी जा सकती है, जो अब तक की सबसे बड़ी गिरावट होगी।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, चांदी में गिरावट की सबसे बड़ी वजह गोल्ड-सिल्वर रेश्यो का तेज बढ़ना है, जो फिलहाल 61 के पार पहुंच चुका है और इसके 70 तक जाने की आशंका है। इसके अलावा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेत न देना, डॉलर इंडेक्स की मजबूती और जियो-पॉलिटिकल तनाव में कमी भी कीमतों पर दबाव बना रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात में बड़ा बदलाव नहीं आता, तब तक चांदी में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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