ईश्वर से जुड़ने का नाम ही योग है : श्रीकांत शर्मा

 

कथा का तीसरा दिन

  • गो सेवा समिति,श्री राणी सती मंडल, केडिया परिवार , रांची के सदस्यों द्वारा स्वागत अभिनंदन किया गया
  • भगवान को पाने का भक्ति मार्ग सर्वश्रेष्ठ है
  • रोज सतयुग कलयुग हमारी जिंदगी में है

टीम एबीएन, रांची। रांची के अग्रसेन भवन के सभागार में श्री मदभागवत कथा के तृतीये दिवस पर मुख्य यजमान श्री मति लता देवी केडिया, ओम प्रकाश केडिया, निरंजन, अजय, संजय केडिया संग परिवार द्वारा श्री मदभागवत व ब्यास पूजन किया गया।
बेदिक मंत्रोचारण के साथ ब्यास पीठ पर विराजमान परम श्रधेय कथा वाचक श्रीकांत जी शर्मा को मुख्य यजमान ओम प्रकाश केडिया सपत्नी द्वारा चंदन, वंदन माल्यर्पण कर उनका अभिनंदन स्वागत किया गया। 

कथा के मुख्य सार को बताते हुए महाराज श्री कहते हैं कि आज ईश्वर की प्राप्ति अपेक्षाकृत मनुष्य शरीर की प्राप्ति से ज्यादा सुलभ है। क्योंकि मनुष्य शरीर की प्राप्ति के लिए एक निश्चित समय सीमा होती है, जो लगती ही लगती है। लेकिन ईश्वर की प्राप्ति जीव को यदि वह समर्पण भाव से प्रभु को याद करें तो सात दिन क्या एक क्षण में हो सकता है ।
तप में ईश्वर को प्राप्त करने की शक्ति होती है।

तप की शक्ति के बल पर ही ध्रुव ने भगवान को 6 महीने में साक्षात रूप में पा लिया।विवेक को सदैव सुरक्षित रखना चाहिए क्योंकि एक बार विवेक नष्ट हो जाता है तो सौ गुणा विपत्ति आ जाती है। जीवन में भी जिसके साथ सुमति होती है उस की संताने देवतुल्य संस्कारिक होती है। जिसकी मती कुमति होती है उसकी राक्षस जैसे निकृष्ट। इसलिए ईश्वर से सदैव सुमति की मांग करनी चाहिये।

कपिल मुनि का वचन है कि ईश्वर से जुड़ने का नाम ही योग है।  सिर्फ आसन प्राणायाम नहीं यह सहायक हो सकते हैं मूल नहीं ,साधक सत्य का लय ईश्वर में करता है ।आयु का अंतिम दिन सुखद हो इसके लिए एकाग्रता के साथ भक्ति करना जरूरी है। भगवान को पाने के लिए भक्ति मार्ग सबसे श्रेष्ठ मार्ग हैं। जो भक्ति करते हैं वह किसी की निंदा या वंदना की परवाह नहीं करते हैं भक्ति से उनके भीतर का अहंकार पिघल जाता है। 

इसके साथ ही वे सहनशील होते हैं, सहनशीलता भक्ति का पहला सूत्र है जिसके मन में करूना है ,दूसरे के दुख को देखकर दुखी हो जाता है, वही भक्ति कर सकता है ।भक्ति में किसी प्रकार का  स्वार्थ नहीं होना चाहिये। भक्त बिना स्वार्थ के सबके हित का कार्य करते हैं। भक्ति सरल हिदय वाले व्यक्ति को प्राप्त होती, चालाक इसे नहीं पा सकता है। भगवान ने खुद कहा है :  निर्मल मन जन सो मोहि पावा ,मोहि कपट छल छिद्र न भावा।

भगवान सरल व्यक्ति के ही निकट आ जाते हैं और चालक से दूर रहते हैं । ज्ञान मार्ग से भी भगवान मिलते हैं लेकिन वह साधकों का मार्ग है भक्त जिस  सरलता से भगवान को पा जाता है ज्ञानी उतनी सहजता से नहीं प्राप्त कर पाते हैं। सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथाओं के संख्याओं में आज तृतीय दिवस की कथा के ऊपर प्रवचन देते हुए बाल व्यास जी कथा सुनाते हुए कहते है कि सबके आदि और अनादि भगवान श्री नारायण है।  

श्रीमद् भागवत कथा से उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मन में विकार आने से संस्कार खराब होने शुरू हो जाते हैं देवता और दैत्य में यही फर्क है देवता सबका भला और दैत्य सबका बुरा चाहते हैं। यह गुण और दोष उनकी जन्म के पूर्व के सोच और संस्कार से जुड़ा है देवता की उत्पत्ति के पीछे जहां सबके कल्याण का चिंतन है वहीं दैत्य के जन्म के पीछे द्वेष का भाव जुड़ा है। दैत्य जब पृथ्वी को सात पाताल के नीचे लेजाकर दवा आये तब भगवान ने सूअर के रूप में अवतार लेकर उसे खोजा और पुरानी जगह पर पृथ्वी को प्रतिष्ठित किया ईश्वर सब को खोजता है इंसान समाज को जो देता है वही पाता है। इसलिए ज्ञान और विद्या को छुपाओ मत उस से  दूसरे का हिट करो। मनु को आदिनारायण बताते हुए उन्होंने कहा कि मनु और शतरूपा से सृष्टि चली।

ब्यासपीठ से महाराज जी कहते है भगवान को पाने का भक्ति मार्ग सर्वश्रेष्ठ है रोज सतयुग कलयुग हमारी जिंदगी में है। आप अपना गुरु मत बदलो। संसार मे आदमी सुख चाहता है लेकिन दुख क्यो होता है। सुख दुख तो लगा रहेगा क्योंकि संसार तत्वो से भरा है। संसार मे किसी को भी दुख मिल रहा है तो समझो गड़बड़ है। पाप करने वाला  बड़ा नही होता लेकिन पाप को स्वीकार्य करने वाला बडा होता है। 

उद्धव प्रसंग, विदुर जी की कथा, मैत्री ऋषि से श्री मदभागवत कथा का श्रबन। पंच तत्व के बिना कोई भी नया आविष्कार नही कर सकता। धुर्व भगवान की झांकी के लोगो ने दर्शन किये। इसके पूर्व कथा स्थल में ब्यास पीठ पर बिराजमान गुरु जी को गो सेवा समिति,श्री राणी सती मंडल, कैड के केडिया परिवार द्वारा माल्यार्पण, अंगवस्त्र देकर उनका अभिनंदन स्वागत किया गया।

धरती पर स्वर्ग की नगरी है गौशाला

आज प्रातः 8 बजे रुक्का स्तिथ हुटुप गौशाला एवं कांके स्थित सुकरहुटू गौशाला कथावाचक परमपूज्य श्री कांतजी शर्मा पहुंचे। दोनों गौशालाओं में गायों को हरा चारा, गुड़, रोटी खिलाया संग गौ माता का पूजन व आरती की। सुकरहुटू गौशाला में श्री कृष्ण गोपाल मंदिर में पूजन किया व दोनों गौशालाओ के गोसेवकों के बीच फल व प्रसाद का वितरण किया। गो सेवको को आशीर्वाद दिया साथ ही गौशाला में गायों के लिए हरे चारे हेतु 5100 रुपये की सहयोग राशि भेंट की उन्होंने कहा कि रांची द्वारा संचालित गौशालाओं के भ्रमण से मन प्रसन्न है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ी सेवा जो प्रभु सेवा की तुलना में है वह गौ माता की सेवा ही है। खास उन गायों के लिए जो दूध नहीं देती है। बूढ़ी और लाचार है ।जिनका लालन पोषण रांची गौशाला में भी हो रहा है। गायों की सेवा में सहयोग करने वाले उन सभी दानदाताओं के प्रति आभार प्रकट किया जिनके भाव हमेशा तन, मन, धन से गौ माता के प्रति अर्पित है। 

गो सेवा पृथ्वी पर आसान कार्य नहीं इसकी सेवा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। रांची गौशाला के पास पर्याप्त गोचर भूमि है।गौशाला भ्रमण किया घास की खेती को देखा साथ ही कहा कि घास गो माता के लिए अमृत के समान होती है। अगर यह गौ माता को 12 महीना मिले तो इससे बड़ा पुण्य कार्य कुछ नहीं हो सकता।

जैसा कि ज्ञात है गुरु जी के द्वारा भी कई राज्यो में गोशालाएं संचालित की जा रही है।खासकर कोलकाता में स्वयं गुरुजी के द्वारा सुरभि सदन गौशाला संचालित की जाती है। जिसमें कुल 2200 गोवंश है प्रतिदिन 18000 रुपये देकर एक गाय को कसाइयों के यहां से छुड़ाकर गुरु जी गौशाला में लाते हैं और उनकी सेवा करते हैं।

कथा श्रबन करने वालो में ओमप्रकाश केडिया, निरंजन केडिया, अजय केडिया, संजय केडिया, निर्मल बुधिया, प्रमोद सारस्वत, प्रेमचंद श्रीवास्तव, राजू पोद्दार, राम कुमार जी, प्रमोद बजाज, बसंत मुरारका, विनोद झुनझुनवाला, कमल सिंघानिया सहित काफी संख्या में लोगो ने कथा श्रबन किया।

7:00 बजे तृतये दिवस की कथा आरती के साथ विराम की गयी। लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कल की कथा दोपहर 3:00 बजे से 7:00 बजे तक होगी आप सभी लोग समय पर आकर श्रीमद् भागवत कथा के रस पान का आनंद अवश्य उठाएं। उक्त जानकारी प्रमोद सारस्वत (9431325438) ने दी।

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