टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के लाइफ मेंबर संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन सभी स्वैच्छिक रक्तदाताओं को समर्पित है, जो निःस्वार्थ भाव से रक्तदान कर अनगिनत ज़िंदगियों को बचाते हैं।
इस दिवस का उद्देश्य रक्तदान के महत्व को जन-जन तक पहुँचाना, अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करना, और सुरक्षित रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2004 में विश्व रक्तदाता दिवस की शुरुआत की थी। यह दिन कार्ल लैंडस्टीनर के जन्मदिन पर मनाया जाता है, जिन्होंने 1901 में रक्त समूहों की खोज की थी।
उनके इस अद्भुत योगदान ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी और रक्तदान को सुरक्षित बनाया। भारत सहित दुनिया भर में हर दिन लाखों लोगों को खून की जरूरत पड़ती है,चाहे वह दुर्घटना पीड़ित हों, सर्जरी के मरीज हों, या थैलेसीमिया, कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोग। रक्तदान के बिना इनकी जान बचा पाना संभव नहीं होता।
विश्व रक्तदाता दिवस का मुख्य उद्देश्य है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं के योगदान की सराहना करना।रक्तदान के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना युवाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करना।सुरक्षित रक्त की उपलब्धता को सुनिश्चित करना। हर वर्ष एक खास थीम के साथ विश्व रक्तदाता दिवस को मनाया जाता है, इस वर्ष का थीम है- रक्त दें,आशा दें, साथ मिलकर हम जीवन बचाते हैं।
इस बार की थीम रक्तदान के महत्व को उजागर करती है। रक्तदान करने से किसी जरूरतमंद व्यक्ति की जान को बचाया जा सकता है। एक व्यक्ति का छोटा-सा कदम किसी अन्य के लिए जीवनदान बन सकता है। एक बार रक्तदान करने से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। शरीर रक्तदान के बाद स्वयं ही कुछ ही दिनों में खोया हुआ रक्त बना लेता है।
18 से 65 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्ति हर 3-4 महीने में रक्तदान कर सकते हैं।नियमित रक्तदान से हृदय रोग और आयरन ओवरलोड की आशंका कम होती है। आज भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रक्तदान को लेकर भ्रांतियाँ फैली हैं। रक्तदान करने से कमजोरी आती है, यह केवल जवान लोग कर सकते हैं जैसी ग़लत धारणाओं को दूर करने की ज़रूरत है।
इस दिशा में स्कूल, कॉलेज, एनजीओ और मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। रक्तदान महादान है -यह न केवल दूसरों की जिंदगी बचाता है, बल्कि समाज में सहानुभूति और मानवता की भावना को भी बढ़ावा देता है। विश्व रक्तदाता दिवस हमें यही सिखाता है कि यदि हम स्वस्थ हैं, तो हमें किसी ज़रूरतमंद के लिए आगे बढ़कर रक्तदान अवश्य करना चाहिए। यह सबसे महान सेवा है-एक सच्चा जीवनदान।
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