एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को विरोध का सामना करना पड़ा। ममता बनर्जी वहां सामाजिक विकास बालिका और महिला सशक्तिकरण विषय पर भाषण दे रही थीं, जब कुछ छात्रों ने उनका विरोध करते हुए भाषण को बीच में ही रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए पोस्टर दिखाये और गो बैक के नारे लगाये।
ये प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में हुई चुनावी हिंसा और आरजी कर कॉलेज में हुई दुष्कर्म और हत्या केस को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने ममता से सवाल किया और राज्य की स्थिति पर अपनी असहमति जतायी। प्रदर्शनकारियों के सवालों का जवाब देते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि टाटा ग्रुप अब खड़गपुर और राजारहाट में उद्योग लगा रहा है, और इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए।
जब प्रदर्शनकारियों ने आरजी कर कॉलेज के मामले पर सवाल उठाया, तो ममता ने कहा कि यह मामला अभी कोर्ट में है और इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही है। इसके अलावा ममता ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि कृपया राजनीति न करें। इस दौरान, पूर्व भारतीय क्रिकेटर सौरव गांगुली भी दर्शकों में मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने अपनी जिम्मेदारी स्टूडेंट फेडरेशन आॅफ इंडिया-यूके (एसएफआइ-यूके) से जुड़ी बताई।
भाजपा ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री को देश की छवि को ठेस नहीं पहुंचानी चाहिए थी। भाजपा प्रवक्ता सजल घोष ने कहा कि ममता को इस तरह के सार्वजनिक मंच पर अपनी सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए थी। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ममता पर आरोप लगाते हुए ट्विटर पर लिखा कि ममता बनर्जी को भारत के दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से परेशानी है।
मालवीय ने ममता को पश्चिम बंगाल के लिए कलंक करार दिया है। इसके अलावा, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने ममता के भाषण के दौरान छात्रों द्वारा किए गए विरोध की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन बिना किसी उचित कारण के था और इसे नकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए।
ममता बनर्जी का लंदन में हुआ विरोध पश्चिम बंगाल के मुद्दों को लेकर बढ़ते असंतोष को उजागर करता है। भाजपा और अन्य विपक्षी पार्टियों ने ममता के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी अंतरराष्ट्रीय मंच पर की गई टिप्पणी और विरोध का विरोध किया है।
ममता के बयान और उनके प्रदर्शन के जवाब में यह स्पष्ट हो गया कि पश्चिम बंगाल की राजनीति और राज्य के मुद्दों को लेकर देश में घमासान जारी है। विपक्षी दलों का कहना है कि ममता को अपनी सरकार के मुद्दों पर ध्यान देने की बजाय अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि पर विचार करना चाहिए था।
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