30 मार्च से चैत्र नवरात्र नववर्ष की शुरुआत और देवी शक्ति की उपासना

 

  • नवरात्रा जीवन में अच्छाई, शक्ति, समृद्धि और आत्मविश्वास का देता है संदेश : संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि 30 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है, जो हिन्दू कैलेंडर के अनुसार नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। यह समय विशेष रूप से मां दुर्गा की उपासना, शक्ति की आराधना और आत्मिक उन्नति का होता है। 

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4.27 बजे से लेकर 30 मार्च को दोपहर 12.49 बजे तक रहने वाली है।उदिया तिथि के चलते, चैत्र नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च को होगी और इसका समापन 6 अप्रैल को होगा। नवरात्रि का अर्थ है- नौ रातें, जिसमें मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना होती है।

चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होकर यह पर्व नौ दिन तक चलता है, जो भारतवर्ष में विभिन्न स्थानों पर अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। नवरात्र का पर्व शक्ति की पूजा का प्रतीक है, जिसमें देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। पहले दिन से लेकर नौवें दिन तक हर दिन एक देवी के रूप की पूजा की जाती है। 

इन रूपों में माँ शैलपुत्री, माँ ब्रह्मचारिणी, माँ चंद्रघंटा, माँ कुष्मांडा, माँ स्कंदमाता, माँ कात्यायनी, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी और माँ सिद्धिदात्री प्रमुख हैं। प्रत्येक देवी के रूप में विशिष्ट ऊर्जा और शक्ति का वास माना जाता है, और इनकी उपासना से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास तथा जीवन में हर तरह की समृद्धि प्राप्त होती है।

चैत्र नवरात्र का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी विशेष है। बल्कि यह हमारे जीवन में आत्मविश्वास शक्ति और शांति लाने का काम भी करता है यह पर्व समाज को एकजुट करता है और नारी शक्ति के प्रतीक रूप में देवी दुर्गा की पूजा का महत्व बढ़ाता है इसके माध्यम से हम अपने जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और साहस का संचार कर सकते हैं। 

यह पर्व विशेष रूप से नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है, जहां लोग अपने जीवन को नए दृष्टिकोण से जीने का संकल्प लेते हैं। नवरात्र के दौरान व्रत, उपवास, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और संकल्पों का आयोजन होता है। विशेष रूप से इस समय व्रति लोग सात्विक आहार, योग और ध्यान का पालन करते हैं, जिससे शरीर और मन की शुद्धि होती है। 

नवरात्र के दौरान अनेक स्थानों पर देवी दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं की पूजा की जाती है। यह समय धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी होता है, जहाँ लोग देवी के गुणों का गुणगान करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सामूहिक रूप से पूजा करते हैं।

इस दौरान विशेष रूप से गरबा, डांडिया और अन्य पारंपरिक नृत्य-गायक संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। चैत्र नवरात्र का पर्व एक अद्भुत अवसर है, जब हम अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए देवी दुर्गा से आशीर्वाद मांगते हैं। यह पर्व जीवन में अच्छाई, शक्ति, समृद्धि और आत्मविश्वास की स्थापना करने का संदेश देता है।

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