ओबीसी के लिए लोहरदगा में ट्रिपल टेस्ट भ्रामक और मिथ्या: डॉ टी साहू

 

  • अधिकार के लिए ओबीसी समाज ने डीसी को ज्ञापन सौंपा
  • ओबीसी समुदाय ने पारदर्शिता से ट्रिपल टेस्ट कराने के लिए एक साथ कई जिलों में ज्ञापन दिया

टीम एबीएन, लोहरदगा। जिले में हुए ट्रिपल टेस्ट को ओबीसी समुदाय ने भ्रामक, छलावा और मिथ्या बताया है। इस बाबत जिले के ओबीसी समुदाय ने राज्यपाल, पिछड़ा वर्ग आयोग, उपायुक्त- सह- जिला शिकायत निवारण अधिकारी को ज्ञापन देकर नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट सर्वे के बारे में ध्यानाकर्षण कराया है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ टी साहू ने किया। उन्होंने कहा कि लोहरदगा में ट्रिपल टेस्ट भ्रामक और मिथ्या है। राज्य में ओबीसी सबसे बड़ा समूह है।

पत्र के माध्यम से कहा गया कि राज्य के नगर निकाय चुनाव से पूर्व ओबीसी का आरक्षण निर्धारित करने के लिए ट्रिपल टेस्ट सर्वे शुरू किया गया। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्देश पर निकायों में बीसी-वन और बीसी-टू वर्ग के नागरिकों का अध्ययन किया जाना है। जिसके तहत आयोग द्वारा सभी जिलों को प्रपत्र उपलब्ध कराया गया है। जिसके तहत निकायों में मतदाता संख्या, मतदाता का नाम, पिता या पति का नाम, उम्र, लिंग, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, बीसी वन व बीसी-टू की पूरी जानकारी भर कर अयोग को सौपने का निर्देश दिया गया है। 

यह डेटा, पहले बूथ स्तर पर, फिर कार्ड स्तर और उसके बाद निकाय के स्तर पर कुल आबादी का डोर-टू-डोर सर्वे के आधार पर 31 जनवरी तक तैयार किया जाना है। पिछड़ा वर्ग आयोग के माध्यम से ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की जानी है। लेकिन सर्वे इस प्रकार नहीं किया जा रहा है। धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, गोड्डा, लातेहार, पाकुड़, साहिबगंज, जामताड़ा, पलामू आदि 15 जिलों के शहरी क्षेत्रों में ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया पूरा हो गया है। 

जबकि यह बात पूरी तरह से भ्रामक, छलावा और मिथ्या है। क्योंकि लोहरदगा जिला के शहरी क्षेत्रों में अभी तक इस प्रकार कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है और न ही डोर-टू-डोर सर्वे के लिए हमारे घर कोई आया। ट्रिपल टेस्ट सर्वे प्रक्रिया में भारी अनियमितता और लापरवाही बरतते हुए खानापूर्ति की जा रही है। 

पिछली जनगणनाओं में भी ओबीसी की जनसंख्या को नहीं दिखाया गया। इस बार भी राज्य में ओबीसी की जनसंख्या को छुपाने की साजिश रची जा रही है। इससे जनवरी 2025 तक 18 वर्ष की आयु के होने वाले बहुत से नए वोटर्स भी वोट देने से वंचित रह जाएंगे। ओबीसी वर्ग के लोग मूल रूप से यहां निवास करने वाले आदिवासी हैं। हमारे हक और अधिकारों के हित में ऐसा खिलवाड़
घोर आपत्ति जनक और निन्दनीय है।

ओबीसी वर्ग के लोग पारदर्शिता पूर्ण ट्रिपल टेस्ट मांग को लेकर पुनः आन्दोलन करने और न्यायालय की शरण में जाने पर मजबूर कर सकता है। ओबीसी वर्ग के आरक्षण के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया सम्पन्न किया जाए। इसकी प्रतिलिपि झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश, राज्य निर्वाचन आयोग, मुख्यमंत्री को भी दी गई है।

ज्ञापन देने वालों में धर्मराज महतो, प्रदीप साहू, मुरली साहू, अभय कुमार महतो, देवेंद्र कुमार मंडल, प्रकाश महतो, उमेश महतो, पिंकी देवी, सविता देवी, सुरेन्द्र राज, अनिल कुमार साहू, चंद्रमुनि देवी, रामू कुमार साहू, कार्तिक गोप, कृष्ण कुमार, सविता देवी, रामकुमार प्रसाद, भागवत साहू, चंद्रशेखर प्रसाद, श्रवण वर्मा, महेश प्रसाद, मदन प्रसाद, राज कुमार वर्मा, अनीता देवी, संजय बर्मन, सरिता देवी, कैलाश कुमार आदि शामिल हैं।

शुक्रवार को लोहरदगा में एनडीसी अभिनीत सूरज को ओबीसी वर्ग के द्वारा ज्ञापन सोपा गया इसमें ट्रिपल टेस्ट सर्वे पारदर्शिता से करने की मांग की गई है प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई डा टी साहू, अभय महतो, देवेंद्र मंडल, राजकुमार वर्मा, धर्मदेव महतो आदि ने किया

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