टीम एबीएन, रांची। होली में एक दिन ही बचा है। होली के त्यौहार के चलते रांची के बाजार में रौनक लगी हुई है। रंग- बिरंगे रंगों से बाजार रंगा हुआ है।
बाजार में हर्बल रंगों की डिमांड सबसे ज्यादा है, जिसे देखते हुए रांची में विभिन्न फलों के पल्प, फूलों, पान के पत्ते और मुल्तानी मिट्टी से गुलाल और नेचुरल रंगों को तैयार किया जा रहा है क्योंकि इसे लगाने से स्किन पर किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता।
व्यवसायी राकेश राजदान ने बताया कि राजधानी रांची से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तुपुदाना के साईं मंदिर के पास महिलाओं द्वारा काफी सस्ते में हर्बल रंग और गुलाल मिल जायेंगे।
रांची के कारोबारी अंशुल गुप्ता ने बताया कि उन्होंने 5 वर्ष पहले स्थानीय महिलाओं की भागीदारी से हर्बल रंग और गुलाल निर्माण का कार्य शुरू किया। संस्थान के ओनर अंशुल गुप्ता का कहना है कि स्थानीय महिलाओं के भागीदारी के कारण हर्बल रंगों के उत्पादन में लगने वाले लोकल फूल मिलने में काफी सहूलियत हुई।
खास बात ये है हर्बल रंग सब्जियों और फलों से बनाये जा रहे हैं। इससे स्किन को कोई नुकसान नहीं होगा। गुलाल बनाने के लिए अरारोट पाउडर के साथ प्राकृतिक रंगों के अर्क को मिलाया जा रहा है।
इसमें चुकंदर से गुलाबी रंग, पालक के रस से हरा रंग, हल्दी और गेंदा का रस निकालकर पीला रंग, पलाश के फूलों से केसरिया रंग बनाया जा रहा है। अंशुल गुप्ता ने कहा कि जब उनका कारोबार बढ़ा तो रंग-गुलाल बनाने के लिए मशीनें भी लगा ली गयी है, जिसके वजह से उत्पादन काफी बढ़ गया है।
एक समय में केवल रांची के बाजार में बिकने वाला हर्बल रंग और गुलाल अब हरियाणा, दिल्ली और पंजाब जैसे राज्यों में भी बेची जा रही है जहां इसकी अच्छी मांग है। वहीं स्थानीय गांव की महिलाओं इससे वो स्वावलंबी भी बन रही हैं।
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