एबीएन सोशल डेस्क। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुञ्ज तत्वावधान में आनलाइन स्वाध्याय मंडल प्रतिनिधित्व में योग आचार्य रविरंजन कुमार के सानिध्य में गुरुवरश्री वेदमूर्ति-तपोनिष्ठ पं श्रीराम शर्मा आचार्य की गायत्री युग साहित्य सांख्य एवं योग दर्शन पुस्तक की योग दर्शन के तत्वज्ञान पर पाठ-संवाद आरंभ हुआ।
बताया कि मानव जीवन का प्रमुख लक्ष्य समस्त दु:खों, क्लेशों, वासनाओं और अतृप्ति से मुक्त होकर सच्चे अर्थ में सुख-शांति और आनंद को प्राप्त करना है। वैसे तो इस उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए समस्त विवेकवान पुरुष अपनी रुचि, बुद्धि व क्षमता के अनुसार विभिन्न साधनों का सहायता लिया करते हैं।
उन्होंने बताया कि ऋषि, मुनियों ने इसके निमित्त विभिन्न प्रकार की उपासनाओं, जप, तप, भक्ति तथा अनेक कर्मकांडों का विधान पात्र-भेदानुसार किया है; तथापि ये सभी विधान आत्मोत्कर्ष हेतु निचले सोपान माने गये हैं। इन साधनों से व्यक्ति लौकिक जीवन में सुख और सफलताएं अर्जित कर सकता है।
किंतु प्रज्ञा अर्थात सत्य-ज्ञान की प्राप्ति करके आत्मा के अन्तिम लक्ष्य कैवल्य के दिव्यानन्द के निमित्त उपर्युक्त साधनों की अपेक्षा कहीं उच्च साधनों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे ही अनेक उच्च साधनों में योग अति महत्त्वपूर्ण साधन है।
अन्य साधनों से यह उच्चतर इसलिए माना जाता है कि जहां अन्य साधन विचारात्मक अथवा सैद्धांतिक हैं, वहीं योग-दर्शन पूर्ण रूपेण व्यावहारिक एवं क्रियात्मक है। अभ्यास क्रम की चर्चा में बताया कि प्रत्येक अभ्यासी साधक इसकी सत्यता और प्रामाणिकता का परीक्षण स्वयं कर सकता है।
योग विद्या व समग्र स्वास्थ्य संवर्धन संबंधित युग साहित्य स्वाध्यायी और कुशल, निपुण आचार्य रविरंजन जी के पावन जन्मदिवस पर स्वाध्याय मंडल के सभी साधक-शिष्य भाई-बहनों ने उन्हें हार्दिक बधाई, उनके दीर्घायुष्य, स्वस्थ-सुखद जीवन, प्रगतिशील और उज्ज्वल भविष्य की मंगलमय स्वस्तिवाचन पाठ किया। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के वरिष्ठ साधक जय नारायण प्रसाद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
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