स्वस्थ रहें, नहीं तो...

 

अजय दीप वाधवा

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। गत दिनों उत्तर प्रदेश से एक दुखद समाचार आया कि विद्यालय में कक्षा दो के एक विद्यार्थी को हृदयघात हुआ और मात्र सात वर्ष की आयु में उसका दुखद निधन हो गया। इतनी कम आयु में हृदय रोग होना आश्चर्य की बात है।

प्राय: बच्चे और युवा समझते हैं कि उनकी आयु अभी कम है और उन्हें स्वस्थ रहने के लिए विशेष कुछ नहीं करना है; कम आयु ही उन्हें स्वस्थ रखेगी। पर उपरोक्त घटना ने सभी बच्चों और उनके माता, पिता और शिक्षकों को इस पर पुन: सोचने के लिए मजबूर किया है। अगर हम स्वस्थ नहीं हैं तो कम आयु में भी घातक बीमारियां हम पर आक्रमण कर सकती हैं।

अब समय आ गया है जब हम बच्चों और युवाओं पर पढ़ाई के समान ही स्वस्थ रहने पर भी ज्यादा जोर दें। उन्हें बताएं कि प्रति दिन आधा घंटा उन्हें अपने शरीर को स्वस्थ रखने पर व्यतीत करना चाहिए। वे इस आधे घंटे में व्यायाम, जिम, योग, जॉगिंग, वाकिंग या तैराकी आदि अवश्य करें। 

उन्हें प्राणायाम करना भी सिखाएं जिसकी उनकी आंतरिक इम्यून सिस्टम भी मजबूत होगी। उन पर बीमारियां जल्दी हमला नहीं कर पायेगी। आजकल विद्यार्थी देर रात तक या तो पढ़ने में या सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं। देर से सोने के कारण वे सुबह देर से उठते हैं। 

इससे उनको सुबह व्यायाम आदि के लिए समय नहीं मिलता। उठते साथ ही स्कूल या कॉलेज जाने की उनकी जदोजहद आरंभ हो जाती है। माता पिता को चाहिए कि वे बच्चों को देर से सोने के नुकसान बतायें। समय पर सोना और समय पर उठने से इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है, जिस से कई बीमारियों से बचाव भी होता है। 

शरीर के लिए अच्छी नींद भी एक बहुत बढ़िया दवा है जो शरीर को स्वस्थ रखता है। साथ ही यह भी सत्य है कि जब हम सुबह जल्दी उठते हैं तो हमारे पास शेष सारे काम करने के लिए अधिक समय उपलब्ध होता है। हेनरी फोर्ड, फोर्ड कार के निर्माता, ने अपनी सफलता का श्रेय सुबह जल्दी उठने को दिया था।

युवा ह्रदय सम्राट स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि एक स्वस्थ मस्तिष्क एक स्वस्थ शरीर में ही रहता है। अगर विद्यार्थी यह चाहते हैं कि वे परीक्षा अच्छे नंबर से पास करें, उन्हे अच्छी नौकरी मिले और जीवन में वे अपने ज्ञान से खूब नाम व पैसा कमाएं तो उनको अपना मस्तिष्क स्वस्थ रखना होगा और यह तभी संभव होगा जब उनका शरीर स्वस्थ होगा। 

स्वस्थ मस्तिष्क के लिए स्वस्थ शरीर एक आवश्यकता हैं। शारीरिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति सिर्फ अपने बीमार और अस्वस्थ शरीर के बारे में ही सोचता रहता है; उसका अपने काम, पढ़ाई या स्वयं के विकास पर ध्यान देने का मन नहीं करता और समय भी नहीं मिलता। 

साथ ही अस्वस्थ शरीर हमारा मेडिकल खर्च भी बढ़ाता है जिस से वित्तीय बोझ भी बढ़ता है। युवा अगर अपने को स्वस्थ रखेगा तो वह देखने में भी आकर्षक लगेगा जो की हर युवा का स्वप्न होता है। मां, बाप और शिक्षकों के लिए यह आवश्यक है कि वे बच्चों को स्वस्थ रहने की प्रेरणा लगातार देते रहें, उन्हें व्यायाम आदि के लिए प्रेरित करें और उसके लिए उन्हें समय भी दें। 

याद रखें कि हमारे विकास के लिए पढ़ाई जितनी आवश्यक है उतनी ही आवश्कता अच्छे स्वास्थ्य की भी है। जो फिट है वही हिट है। (लेखक कॉस्ट अकाउंटेंट सह मोटीवेटर हैं।)

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse